झांसी। विश्व ह्रदय दिवस पर ह्रदय रोग विशेषज्ञ व डायरेक्टर लाइफलाइन
हॉस्पिटल डॉ. प्रवीण जैन ने पत्रकार वार्ता में बताया कि हार्ट अटैक अक्सर
अनुवांशिक होता है। जिनके परिजन इससे पीड़ित रहे हैं, उनमें यह बीमारी होने
की आशंका अधिक रहती है। तंबाकू, शराब, धूम्रपान की लत, वसा, मीट व नमक के
अधिक प्रयोग, व्यायाम की कमी, मोटापा, फास्ट फूड का प्रचलन, मानसिक तनाव से
हार्ट अटैक होने का प्रमुख कारण हैं।
उन्होंने कहा कि ह्रदय रोगों की
रोकथाम में जीवन शैली में परिवर्तन का बहुत महत्व है। लंबाई के मुताबिक
सीमित वजन, चालीस मिनट तेज सैर, हरी सब्जी, फल, सूखे मेवा आदि का सेवन
लाभप्रद है। मानसिक तनाव की मुक्ति को योग व ध्यान बहुत सहायक है। कम से कम
सात घंटे की गहरी नींद भी ह्रदय रोग से बचाव में अहम है। उन्होंने बताया
कि डायबिटीज, उच्च रक्तचाप, गुर्दे की बीमारी का उचित इलाज कराना चाहिए।
पश्चिमी देशों में ह्रदय की बीमारियों में जहां पिछले बीस सालों में लगभग
चालीस से पचास प्रतिशत की कमी आई है, वहीं भारत में यह बीमारी निरंतर बढ़ती
जा रही है। छाती में दर्द या भारीपन, जलन होना हार्ट अटैक के प्रथम लक्षण
हो सकते हैं।
इस स्थिति में दोनों या एक हाथ में व जबड़े या कमर में दर्द
होता है, साथ में पसीना, उल्टी, चक्कर, बेहोशी भी आ सकती है। हार्ट अटैक की
आशंका होने पर रोगी को तुरंत एक गोली एस्प्रिन देकर फौरन अस्पताल ले जाना
चाहिए। इसके साथ ही यदि थक्का घोलने का इंजेक्शन कुछ ही घंटों में लग जाए
तो इससे बहुत आराम मिलता है। ऐसे रोगियों को एन्जियोग्राफी की जांच की
आवश्यकता पड़ती है व बाद में बाईपास सर्जरी की राय दी जाती है।