झांसी। कोरोना के चलते ग्वालियर श्योपुर कलां छोटी लाइन पर गाड़ियों का संचालन बंद होने से पिछले नौ माह से 179 फालतू बैठे है। इस लाइन पर 27 स्टेशन है। इन कर्मचारियों को विभाग हर माह करीब एक करोड़ रुपये का भुगतान करता है। अब छोटी लाइन (नैरोगेज) के स्टेशनों पर फालतू बैठे कर्मचारियों से दूसरी जगह काम लिया जाएगा। इस लाइन को बड़ी लाइन (ब्रॉडगेज) में बदलने का काम जल्द शुरू होने जा रहा है। छोटी लाइन को उखाड़ने का ठेका हो चुका है।
अभी ग्वालियर श्योपुरकलां के बीच 200 किलोमीटर में छोटी लाइन का ट्रैक बिछा हुआ है। इस लाइन पर 27 स्टेशन हैं, जिन पर अधिकारी, स्टेशन मास्टर, गैंगमैन, ट्रालीमैन, सिगनल समेत अन्य पदों के 179 कर्मचारी कार्यरत हैं। कोरोना महामारी के चलते विगत 23 मार्च से इस ट्रैक पर ट्रेनों का संचालन बंद चल रहा है। जिससे उक्त सभी कर्मचारी बिना कार्य के बैठे है। अब इन कर्मचारियों से दूसरी जगह पर कार्य कराया जाएगा। साथ ही अब इस छोटी लाइन को बड़ी लाइन में बदलने का ठेका हो गया है। ठेका पुणे की एक कंपनी को दिया गया है। जल्द छोटी लाइन को उखाड़ने का काम शुरू होने वाला है। बड़ी लाइन को बिछाने में कम से कम तीन साल का वक्त लगेगा।
ग्वालियर- श्योपुरकलां छोटी लाइन के स्टेशनों पर तैनात कर्मचारियों को दूसरे स्टेशनों पर जरूरत के हिसाब से काम लिया जाएगा। अभी स्टेशनों के उपकरणों की सुरक्षा के लिए एक- एक स्टेशन मास्टर व प्वाइट्समैन बने रहेंगे। स्टेशन बिल्डिगों के हटने पर उक्त कर्मी भी दूसरी जगह तैनात कर दिए जाएंगे। मनोज कुमार सिंह, जनसंपर्क अधिकारी।
चार प्रकार की लाइनों का होता है उपयोग
देश में चार तरह की रेल पटरियों का उपयोग होता है। इसमें ब्रॉड गेज (1676 मिमी चौड़ी), मीटर गेज (1435 मिमी चौड़ी), नैरो गेज (976 मिमी चौड़ी) और स्टेंडर्ड गेट (976 मिमी चौड़ी) शामिल है। ब्रॉड गेज को बड़ी लाइन कहा जाता है। अधिकांश सामान्य ट्रेनें इसी लाइन पर दौड़तीं हैं। नैरोगेज लाइन का पहाड़ों पर ज्यादा उपयोग होता है। स्टैंडर्ड लाइन पर मेट्रो ट्रेनें चलतीं हैं। मीटर गेज लाइन का बहुत कम उपयोग होता है।