झांसी में दादा ने पोते की गला दबाकर हत्या कर दी। हत्या कर शव को भूसे के ढेर में छिपा दिया। पुलिस को चकमा देने के लिए साथ में पोते की तलाश रहा था। गांव के लोगों का कहना था कि दादा ने अपने हाथों से अपने वंश का ही गला घोंट दिया।
उत्तर प्रदेश के झांसी जिले से दिल दहलाने वाली खबर सामने आई है। यहां जेब से महज सौ रुपये निकालने पर दादा ने मासूम बच्चे को मार डाला। इसके साथ ही शव को भूसे के ढेर में छिपा दिया। आरोपी दादा ने पुलिस को चकमा भी दिया। वह खुद मासूम को तलाश करने का नाटक करता रहा।
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जानकारी के अनुसार, मासूम बच्चे ने दादा की जेब से 100 रुपये निकाल लिए। इस पर दादा सरवन इतना नाराज हो गया कि उसने अपने आठ साल के इकलौते मासूम पोते मुकेश का गला घोंट दिया। हत्या के बाद उसका शव भूसे के ढेर में छिपा दिया।
पुलिस को चकमा देने के लिए कई घंटे उनके साथ शव को तलाशता रहा। शक होने के बाद सोमवार को पुलिस ने उससे पूछताछ की। इसमें उसने हत्या की बात कबूल कर ली। हत्यारोपी दादा ने पुलिस से कहा कि वह उसे मारना नहीं चाहता था। गुस्से में गला दबा दिया।
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सरवन की जेब से कोई न कोई सदस्य निकाल लेता था पैसा
पुलिस ने आरोपी को हिरासत में ले लिया है। पुलिस उससे अभी पूछताछ कर रही है। क्षेत्राधिकारी मनोज कुमार सिंह का कहना है कि हत्यारोपी सरवन (50) बकरियां चराने जैसा छोटा मोटा काम करता था। कुछ पैसे मिलने पर वह अपने खर्चे के लिए रखता था। अक्सर यह पैसा कोई न कोई सदस्य निकाल ले जाता था।
इस बात से वह परेशान था। उसकी जेब में सौ रुपये थे। यह पैसा भी कोई निकाल ले गया। शनिवार दोपहर को मुकेश के दिखने पर उसने यह बात उससे पूछी। मुकेश का जवाब सुनकर उसे गुस्सा आ गया। गुस्से में मुकेश का गला पकड़कर जोर से दबा लिया। उसके मुंह से खून निकल आया।
लाश भूसे में फेंककर बकरियां चराने चला गया
कुछ देर में उसकी मौत हो गई। यह देखकर वह डर गया। चुपचाप उसकी लाश भूसे में फेंककर बकरियां चराने निकल गया।बता दें, शनिवार को मुकेश की लाश घर के अंदर भूसे के ढेर से बरामद हुई थी। मुकेश गांव के ही सरकारी विद्यालय में कक्षा तीन का छात्र था।
शनिवार को वह स्कूल नहीं गया था। सोमवार को पुलिस ने हत्यारोपी दादा सरवन को गिरफ्तार कर लिया। खुलासा करने वाली पुलिस टीम में थाना प्रभारी सरिता मिश्रा, उपनिरीक्षक अखिलेश कुमार, विजय शंकर शुक्ला, भूमिराज सिंह शामिल रहे।
बेटे की मौत के बाद अब तक संभल नहीं पाई मां
मुकेश मां-बाप का इकलौता बेटा था। उससे बड़ी एक बहन है। मुकेश की मौत के बाद से मां चंद्रमुखी का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। बेटे की हत्या में ससुर सरवन का हाथ होने की बात मालूम चलने पर ससुर की लानत-मनालत करने लगी।
गांव के लोग भी सरवन का हाथ होने की बात सुनकर दंग रह गए। सरवन का भी राजवेंद्र ही इकलौता बेटा है। सरवन के गुस्सैल स्वभाव के होने की वजह से उसकी गांव में भी बहुत कम लोगों से बनती थी। गांव के लोगों का कहना था कि दादा ने अपने हाथों से अपने वंश का ही गला घोंट दिया।
आठ घंटे तलाशने के बाद बरामद हुई थी लाश
मुकेश का शव घर के अंदर ही पड़ा था लेकिन पुलिस और परिवार के लोग गांव से लेकर रिश्तेदारों के घरों तक उसे तलाशते रहे। हैरत की बात यह कि बाबा सरवन भी पुलिस के साथ ही उसको तलाश करता रहा।
उसने पुलिस से भी कहा कि वह घर में मुकेश को तलाश चुका है मुकेश अंदर नहीं मिला। थाना प्रभारी सरिता मिश्रा ने जब खुद घर की तलाशी लेने का फैसला किया, तब मुकेश का शव बरामद हो सका।