अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। रबी सीजन में चना के किसानों की इस समय बल्ले-बल्ले हो गई है। मंडी में चने की कीमत एमएसपी (न्यूनतम समर्थन मूल्य) के मुकाबले करीब 500 रुपये प्रति क्विंटल तक अधिक मिल रही है। ऐसे में किसान मंडी का रुख कर रहे हैं वहीं, सरकारी केंद्रों पर सन्नाटा पसरा है। मंडी में दाम अधिक होने से किसानों के चेहरे पर रौनक है।
झांसी, चिरगांव, टहरौली, मऊरानीपुर समेत अन्य अनाज मंडियों में चने का भाव आसमान पर जा पहुंचा है। यहां चने का भाव 5800-5900 रुपये प्रति क्विंंटल तक है जबकि सरकारी दाम (एमएसपी) 5400 रुपये प्रति क्विंटल है। ऐसे में किसानों को प्रति क्विंटल करीब 400 रुपये का फायदा हो रहा है। मंडी में किसान अपनी उपज लेकर पहुंच रहे हैं। कारोबारियों के मुताबिक झांसी समेत आसपास के इलाकों में ओलावृष्टि से चने की फसल को काफी नुकसान हुआ। ऐसे में मांग के मुताबिक चना बाजार में नहीं आ रहा। इस वजह से दाम पिछली बार के मुकाबले अधिक हो गया है। पिछले रबी सीजन में चना का दाम 4900-5000 रुपये प्रति क्विंटल तक ही था। मंडी कारोबारी रामनरेश साहू का कहना है कि चना की आवक कम होने से मंडी में दाम बढ़ रहा है। आने वाले समय में दाम और बढ़ने की उम्मीद है। इसका सीधा फायदा किसानों को मिल रहा है। गढ़मऊ निवासी अविनाश भार्गव का कहना है कि किसान सिर्फ मंडी में उपज बेच रहे हैं।
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मंडी में एमएसपी से अधिक मूल्य पर चना की बिक्री होने से इसकी सरकारी खरीद नहीं हो पा रही। किसान मंडी में चना बेच रहे हैं। इससे किसानों को फायदा हो रहा है। सरकारी क्रय केंद्र में अभी कोई खरीद नहीं हो सकी है।
उदयभानु
संयुक्त आयुक्त एवं निबंधक, सहकारिता
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30 हजार हेक्टेयर में ही बच सकी फसल
कृषि विभाग की आंकड़ों के मुताबिक रबी सीजन में करीब 45 हजार हेक्टेयर में चना की बुवाई हुई थी। सबसे अधिक बुवाई मऊरानीपुर, बड़ागांव, गुरसराय, बबीना आदि इलाकों में हुई लेकिन, जनवरी-फरवरी माह में हुई ओलावृष्टि से चना को काफी नुकसान हुआ। करीब पंद्रह हजार हेक्टेयर की फसल नष्ट हो गई। इसी तरह दिसंबर महीने में सूरज की पर्याप्त रोशनी न मिलने की वजह से पैदावार उम्मीद के मुताबिक नहीं हुई। इन वजहों से भी चने का उत्पादन घटा है।