महोबा विद्युत वितरण खंड (द्वितीय) में हुए करीब ढाई करोड़ रुपये के गबन के मामले में तीन साल लंबी चली जांच में मुख्य कैशियर समेत चारों आरोपी विद्युत कर्मियों की साठगांठ की पुष्टि हुई है। इनके साथ तत्कालीन अधिशासी अभियंता की भूमिका भी संदिग्ध मिली है। जांच पूरी करके विजिलेंस इकाई अब इनके खिलाफ चार्जशीट दाखिल करने की तैयारी में है।
सितंबर 2020 से जनवरी 2021 के बीच महोबा के कबरई स्थित विद्युत वितरण खंड द्वितीय में तैनात मुख्य कैशियर आशीष गुप्ता ने टीजी-टू कर्मी दौलत राम, अजीत प्रजापति एवं रामकुमार वर्मा से मिलीभगत करके सैकड़ों उपभोक्ताओं की ओर से जमा विद्युत बिल की रकम को सरकारी खजाने में नहीं भेजा। चार माह तक जब पावर कारपोरेशन के खाते में पैसा जमा नहीं हुआ तब फीडिंग की पड़ताल की गई। 2.41 करोड़ रुपये का गोलमाल उजागर हुआ।
सरकारी खजाने की रकम में गोलमाल का मामला सामने आने से अफसरों में खलबली मच गई। सदर कोतवाली में मुख्य कैशियर आशीष गुप्ता समेत चारों आरोपियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने के साथ मुख्य कैशियर को निलंबित कर दिया गया था।
झांसी सेक्टर विजिलेंस को सौंपी जांच
वर्ष 2022 में इस मामले की जांच झांसी सेक्टर विजिलेंस को सौंपी गई। विजिलेंस टीम ने तीन सौ से अधिक फाइलों को खंगालने के साथ तीन दर्जन से अधिक लोगों से पूछताछ की। तीन साल लंबी छानबीन के बाद चारों कर्मचारियों में साठगांठ करके रकम हड़पने की पुष्टि हुई। तत्कालीन अधिशासी अभियंता ग्रामीण की भूमिका भी विजिलेंस को संदिग्ध मिली। हैरानी की बात यह कि तत्कालीन अधिशासी अभियंता ने ही मुख्य कैशियर को निलंबित किया था। वहीं, एसपी आरके यादव के मुताबिक जांच पूरी करके रिपोर्ट भेजी जाएगी।
चोरी-छिपे खोल दिया था काउंटर
छानबीन में मालूम चला कि मुख्य कैशियर आशीष गुप्ता महोबा में वसूली के लिए तैनात था। यहां काउंटर न लगा कर क्रशर और बड़े बकायेदारों से वसूली के लिए उसने चोरी-छिपे कबरई में काउंटर खोल रखा था। वहां से उसने बड़े बकायेदारों से रकम वसूल ली। इसकी भनक विद्युत अभियंताओं को नहीं लगी। जब वसूली की रकम राजस्व खाते में जमा नहीं हुई तब मामले का भंडाफोड़ हुआ।