टोड़ीफतेहपुर। लाखों रुपये की लागत से बने नवीन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव में जूझ रहा है। जहां मूलभूत चिकित्सा सुविधाओं का अभाव है। जिससे मरीजों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। अस्पताल में न तो स्थायी चिकित्सक उपलब्ध हैं और न फार्मासिस्ट, स्टाफ नर्स हैं। लैब टैक्नीशियन होने के बाद भी महीनों से नदारद हैं। अस्पताल एक वार्ड बॉय और स्वीपर के भरोसे चल रहा है, जिससे स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह चरमराई हुई हैं।
नगरवासियों ने बताया कि सरकारी अस्पताल में संविदा पर कार्यरत डॉक्टर कभी-कभार ही अस्पताल में नजर आते हैं और यही हाल नियुक्त दो एएनएम का है, जो सप्ताह में केवल दो दिन बुधवार और शनिवार को टीकाकरण के लिए ही आती हैं। ऐसे में गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों को मजबूरी में निजी डॉक्टरों से इलाज कराना पड़ता है। क्षेत्र के अरविंद सोनी, नरेंद्र परिहार, रवि कुमार, विनोद कुमार, ओमप्रकाश सोनी, लालाराम सोनी ने जिलाधिकारी से सरकारी अस्पताल में स्थायी डॉक्टर, फार्मासिस्ट, स्टाफ नर्स एवं लैब टैक्नीशियन की नियुक्ति कराए जाने की मांग की है। चिकित्सा अधीक्षक गुरसराय ओपी राठौर ने बताया कि अस्पताल में स्टाफ कमी के संबंध में उच्चाधिकारियों को अवगत कराया है।
बातचीत
सरकारी अस्पताल में डॉक्टर और स्टाफ की अनुपलब्धता सरकार की स्वास्थ्य सेवाओं की असलियत को उजागर करती है। - अवधेश तिवारी, नगर अध्यक्ष, कांग्रेस
सरकारी अस्पताल स्वयं बीमार है, ऐसे में लोगों का इलाज हो पाना कैसे संभव है। जहां स्टाप तक नहीं है, कौन दवा देगा और कौन जांच करेगा। - अमित गुप्ता व्यापार मंडल अध्यक्ष