जालौन के कुरोना गांव निवासी बैनी केवट के घर में तीन भैंसें पली हुईं थीं, जिनकी देखभाल उनकी बेटी रजनी करती थी। उन्हें चारा देने से लेकर उनके पानी तक का इंतजाम रजनी ही करती थी। रजनी को उनका साथ बहुत अच्छा लगता था और वह अपना ज्यादातर समय भैंसों के साथ ही बिताती थी।
पिता ने बताया कि आठ जुलाई को भैंसें चरने के लिए छोड़ी थीं, लेकिन वे लौटकर वापस नहीं आईं। इससे रजनी अवसाद में रहने लगी थी। इसी अवसाद के चलते 20 जुलाई को उसने घर में फांसी लगा ली। हालत गंभीर होने पर उसे उरई से झांसी मेडिकल कॉलेज लाया गया। यहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई।