जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की नाक के नीचे जिले में लिंग परीक्षण का गोरखधंधा चल रहा है। इसके लिए बाकायदा एजेंट सक्रिय हैं। महज पांच से दस हजार रुपये में लिंग की जांच कराकर पता लगाया जा सकता है कि कोख में पल रहा लड़का है या लड़की। खास बात ये है कि जनपद में लिंग परीक्षण ज्यादातर बाहरी शहरों और राज्यों के लोगों का कराया जा रहा है। ताकि, शहर में इस खेल का ‘शोर’ सुनाई न हो।
शहर में संचालित दस अल्ट्रासाउंड सेंटरों पर ट्रैकर तक नहीं लगे हैं। जबकि, बिना ट्रैकर के अल्ट्रासाउंड मशीन चलनी ही नहीं चाहिए। इसे स्वास्थ्य विभाग का लचर रवैया न कहें तो भला क्या कहें? इन सेंटरों को विभाग नोटिस जारी कर चुप्पी साध लेता है। किसी का भी लाइसेंस निरस्त नहीं किया गया। इससे स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान खड़े हो रहे हैं।
स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों ने बताया कि पीएनडीटी एक्ट के तहत पिछले सात साल में लिंग परीक्षण में लिप्त सिर्फ एक युवक ही पकड़ा गया है। वह भी आठ दिन पूर्व हरियाणा पुलिस एक अल्ट्रासाउंड सेंटर से युवक को उठाकर ले गई है। हरियाणा में लिंग परीक्षण का मामला सामने आने के बाद पुलिस को झांसी का कनेक्शन मिला था। इसके बाद पुलिस युवक को पकड़कर अपने साथ ले गई।
अल्ट्रासाउंड केंद्रों पर छापा मार अभियान चलाया जाएगा। जिन सेंटरों पर अल्ट्रासाउंड मशीन में ट्रैकर नहीं लगे हैं, उनको नोटिस दिया जाएगा। यदि कहीं पर भी लिंग परीक्षण होने की बात सामने आती है तो तत्काल कार्रवाई की जाएगी। - डॉ. जीके निगम, सीएमओ।