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कंपनियां कागजों पर कूड़ा उठाती रहीं, अधिकारी सोते रहे

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Garbage company in wrote paper, officer sleep
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झांसी। महानगर में कूड़ा कलेक्शन के नाम पर करोड़ों रुपये का खेल हुआ है। आगरा की तरह झांसी में भी कूड़ा कलेक्शन कंपनियों ने अपनी कलाकारी दिखाई। हर साल कंपनियों को कूड़ा लेने के नाम पर नगर निगम की ओर से पांच करोड़ रुपये का भुगतान होता रहा। जबकि पांचों कंपनियां यूजर चार्ज के तौर पर साल भर में 80 लाख रुपये ही दे सकीं। खास बात यह है कि कं पनियां पांच साल में करीब 22 करोड़ रुपये से अधिक नगर निगम से ले चुकी हैं, लेकिन आज तक किसी ने भी कूड़ा कलेक्शन के काम का सत्यापन और जांच कराने की जहमत तक नहीं उठाई।
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महानगर में पांच साल पहले कूड़ा कलेक्शन के लिए नगर निगम ने पांच कंपनियों से अनुबंध किया था। अनुबंध के मुताबिक कंपनियों को महानगर के 100 फीसद घरों से कूड़ा लेना था और 40 फीसद घरों से यूजर चार्ज लेकर नगर निगम को देना था। लेकिन कंपनियां इसे लेकर मनमानी करती रहीं। कंपनियों ने 40 फीसद घरों से न तो यूजर चार्ज वसूला और न ही कूड़ा लिया, लेकिन नगर निगम से कंपनियों को 100 फीसद भुगतान होता रहा। नगर निगम में कंपनियों ने यूजर चार्ज के तौर पर साल भर में करीब 80 लाख रुपये जमा कराए, लेकिन भुगतान हर साल करीब पांच करोड़ का होता रहा। कंपनियों के काम का कभी सत्यापन नहीं कराया गया। इसे लेकर पिछले दिनों हुई कार्यकारिणी की बैठक में पार्षदों ने सवाल उठाए, तो अधिकारियों ने जांच की बात कह दी, लेकिन दो महीने बाद भी जांच शुरू ही नहीं हुई।
कहते हैं आंकड़े
महानगर में कुल मकान- 1.20 लाख
प्रति कंपनी को मिले वार्ड:- 12
एक कंपनी के हिस्से में मकान- 24 हजार
पांच कंपनियों ने यूजर चार्ज वसूला- 48000 घरों से
कूड़ा लिया जा रहा- 50 हजार घरों से
नगर निगम ने भुगतान किया - पांच करोड़ रुपये एक साल में
20 फीसद कटौती कर चुका निगम
नगर निगम के अधिकारियोें का कहना है कि करीब डेढ़ साल से कंपनियों को 20 फीसद कटौती कर भुगतान किया जा रहा है। पिछले साल ही डोर टू डोर में चार करोड़ 85 लाख का भुगतान हुआ है। तो 20 फीसद अधिक भुगतान पाकर कंपनियों ने 3.5 साल तक खूब मनमानी की।
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पार्षद बोले: जांच कर ब्लैक लिस्टेड करें
पूरे महानगर में कूड़ा कलेक्शन होता ही नहीं है। मेरे घर से ही कंपनी के कर्मचारी कूड़ा लेने नहीं आते थे। एक महीने से आने लगे हैं। वार्ड में करीब 80 फीसद घरों से कूड़ा नहीं लिया जाता। इसकी जांच कराई जाए।- राजेश त्रिपाठी उपसभापति
हमने ये मुद्दा कार्यकारिणी समिति में भी उठाया था। नगर आयुक्त ने जांच कराने की बात कही थी, लेकिन आज तक कुछ नहीं हुआ। कूड़े के नाम पर भ्रष्टाचार हो रहा है। अधिकारी कामों की जांच कराने से बच रहे हैं। - महेश गौतम, पार्षद
मार्च 2019 में कंपनियों से अनुबंध खत्म हो गया। तो अधिकारियों ने किस आधार पर अनुबंध आगे बढ़ा दिया। कंपनियों को अब तक ब्लैक लिस्टेड नहीं किया गया है। मामले की जांच कर कंपनियों के खिलाफ एफआईआर कराई जाए। - विमलकिशोर पार्षद
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कार्रवाई के मूड में नहीं निगम
कूड़ा कलेक्शन को लेकर आगरा नगर निगम में झांसी की कंपनियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज हो चुकी है। साथ ही कंपनियां पांच साल से झांसी नगर निगम में भी काम कर रही हैं। लेकिन झांसी नगर निगम कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई के मूड में नहीं है। मामले में महापौर रामतीर्थ सिंघल का कहना है कि यह जांच का विषय है। लेकिन नई शर्तों के साथ नए टेंडर कराए जा रहे हैं। वहीं निगम के अधिकारी भी नया टेंडर करने का राग अलाप रहे हैं। जबकि अब तक कंपनी द्वारा किए गए खेल की जांच कराने की बात कोई नहीं कह रहा।
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कंपनियों की तलाश में जुटी पुलिस
आगरा में झांसी की कंपनियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज होने के बाद पुलिस सक्रिय हो गई। पुलिस ने कंपनियों की स्थिति और कार्यालयों की जांच के लिए तैयारी शुरू कर दी है। आगरा में घोटाला कर भागने के बाद कंपनियों की खोज के लिए पुलिस ने नेटवर्क तेज कर दिया है। जांच चल रही है कि झांसी और आगरा की तरह कंपनियां किसी अन्य जिले में तो काम नहीं कर रही हैं।
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