झांसी। रेलवे वैगन मरम्मत कारखाने में अब अंदर जाने वाले डिब्बों (वैगनों) को उसी रास्ते बाहर नहीं निकालना पड़ेगा। वैगनों को वापस लाने के लिए दूसरा गोलाकार ट्रैक डाला जा रहा है। ठेका लेने वाली नोएडा की एक कंपनी ने आधा काम पूरा कर लिया है। यह काम 40 करोड़ की लागत से पूरा होना है।
भारतीय रेल के लिए सर्वाधिक वैगनों का उत्पादन करने वाला झांसी वैगन मरम्मत कारखाना 25 नवंबर को अपने स्थापना के 125 साल पूरे कर चुका है। कारखाने को बुंदेलखंड के पहले औद्योगिक इकाई के रूप में जाना जाता है। कारखाने में ऑयल टैंक, सेना, गिट्टी समेत सभी प्रकार के वैगनों की मरम्मत की जाती है। वर्तमान में यहां पर करीब 675 वैगनों की मरम्मत हर माह हो रही है। अभी जो वैगन यहां मरम्मत के लिए लाइनों से लाए जाते हैं। मरम्मत के बाद उसी लाइन से वापस बाहर निकालना पड़ता है। आगे लाइनें आपस में जुड़ी नहीं हैं। लेकिन अब यूनी फ्लो डायरेक्शन (एक दिशा में प्रवाह) में पटरियों को जोड़ा जा रहा है। इसके लिए एक किलोमीटर के दो अतिरिक्त ट्रैक कारखाने में आगे की तरफ बनाए जा रहे हैं। इसके निर्माण के बाद वैगनों को एक तरफ से ले जाकर दूसरी तरफ से निकालने का रास्ता मिल जाएगा। आधा काम पूरा कर लिया गया है।
बगीचों ने बदल दिया कारखाने का स्वरूप
रेलवे कारखाने में कई एकड़ जमीन खाली पड़ी है। वैगन मरम्मत 22 शॉपों के अलावा जो भी खाली जमीन थी, उस पर कबाड़ पड़ा रहता था। झाड़ियों से जंगल जैसा लगता था, लेकिन पिछले दो साल में कारखाने का स्वरूप ही बदल गया है। मुख्य कारखाना प्रबंधक आरडी मौर्या के निर्देशन में अलग- अलग जगह दस बगीचे विकसित किए गए। बगीचों को भी बेहद खूबसूरत बुंदेली व आधुनिक परंपरा पर तैयार किया गया है। स्क्रैप से गेट वे ऑफ इंडिया व इंडिया गेट भी बनाए गए हैं। अब कर्मचारी स्क्रैप से ताजमहल का भी निर्माण कर रहे हैं।
एक नजर में कारखाना
उत्तर मध्य रेलवे के झांसी मंडल में 25 नवंबर 1895 को स्थापित इस रेलवे वैगन मरम्मत कारखाने में वैगन मरम्मत के लिए वेल्डिंग, पेंटिंग, एसएसई यार्ड, एसएसई रीहेब, बीडब्लूआर, पावर हाउस, मिड नाइट, धातुशाला, व्हील, मशीन, आर बी फर्स्ट, सेकेंड, थर्ड, एयर ब्रेक लैब, टूल रूम समेत बाइस शॉप हैं। वर्तमान में इन शापों में तकरीबन 3800 कर्मचारी कार्यरत हैं। सात सौ कर्मचारी कार्यालय के काम में लगे हैं। मरम्मत के लिए देश भर से यहां वैगन भेजे जाते हैं। यहां प्रतिमाह 675 वैगनों की मरम्मत का लक्ष्य दिया गया है। आम दिनों में यहां कर्मचारी सुबह आठ बजे से शाम पांच बजे, शाम चार बजे से रात 12 बजे और रात 12 बजे से सुबह आठ बजे की पाली में काम करते हैं।