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बेटा सरकारी नौकर, मां ले रही वृद्धा पेंशन

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झांसी। सरकार की पेंशन योजना मजाक बनकर रह गई है। अपात्रों के खाते में हर महीने पेंशन पहुंच रही है, तो पात्र पेंशन के लिए दफ्तर के चक्कर काटने को मजबूर हैं। हाल ही में समाज कल्याण विभाग द्वारा कराए गए सर्वे के बाद अपात्रों की पोल खुली है। जिले में 42 लोग ऐसे मिले हैं, जो पूरी तरह से अपात्र हैं। जबकि 1700 पेंशनधारकों की मौत हो चुकी है। विभाग ने सभी को रिकवरी के लिए नोटिस भेजे हैं।
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जिले में करीब 63749 लोगों को वृद्धावस्था पेंशन योजना का लाभ मिल रहा है। योजना के तहत हर साल सरकार लाभार्थियों का सत्यापन कराती है। इस बार भी जिले सभी निकायों और ग्राम पंचायतों में विभाग ने लाभार्थियों का सत्यापन कराया। जिसमें सामने आया कि 1768 लाभार्थियों की मृत्यु हो चुकी है। जबकि 42 लोग ऐसे पाए गए, जिनके यहां सरकारी नौकरी, कार और अन्य सुख-सुविधाएं मिलीं। विभाग की ओर से सभी को पहली तिमाही की पेंशन भेज दी गई। विभाग की ओर से मृतकों को मृत्यु तिथि से अब तक मिली पेंशन और अपात्रों से पेंशन शुरू होने की तिथि से रिकवरी कराने के लिए नोटिस भेजे हैं।
केस नंबर एक
मोंठ ब्लॉक के एक गांव में सत्यापन के दौरान अपात्र की पोल खुली। बेटा सरकारी नौकरी में है और मां वृद्धावस्था पेंशन का लाभ ले रही थी। जांच में पता चला कि महिला के नाम दो साल पहले पेंशन जारी की गई।
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केस नंबर दो
गरौठा में एक वृद्ध पिछले तीन साल से पेंशन का लाभ ले रहे थे। जांच में सामने आया कि वृद्ध के नाम आलीशान मकान और कई बीघा खेती की जमीन है। इसके साथ ही घर में ट्रैक्टर और कार है। इस पर पेंशन रिकवरी के लिए नोटिस दिया गया।
केस नंबर तीन
मऊरानीपुर क्षेत्र में एक महिला के नाम से पेंशन दी जा रही थी। यहां सामने आया कि महिला के पति की ज्वैलर्स की दुकान है। इसे लेकर पेंशन बंद कर दी गई है। विभाग ने नोटिस भेजकर वसूली की कार्रवाई शुरू की है।
सत्यापन के दौरान 42 लोग अपात्र मिले हैं। जबकि करीब 1700 मृतक मिले हैं। अपात्रों और मृतकों के परिजनों को रिकवरी के लिए नोटिस जारी किया गया है। सुनील कुमार सिंह, समाज कल्याण अधिकारी
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