झांसी। विश्व आर्द्र भूमि दिवस (वर्ल्ड वेटलैंड डे) के मौके पर वन विभाग द्वारा ग्वालियर मार्ग स्थित सिमरधा बांध पर कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में वनकर्मियों ने पक्षियों का दीदार किया। वहीं स्कूली बच्चों की प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में एक कदम संस्था, एलएल मेमोरियल स्कूल और एस्कार्ट मार्डन स्कूल के विद्यार्थियों ने प्रतिभाग किया।
कार्यक्रम में मुख्य वन संरक्षक पीपी सिंह ने कहा कि मानव अस्तित्व को बचाने के लिए आर्द्र भूमियों का संरक्षण के साथ ही दायरे को बढ़ाना आवश्यक है। कहा कि आर्द्र भूमि जल के प्रदूषण को दूर कर उसे शुद्ध बनाती है, इसलिए वेटलैंड अथवा आर्द्र भूमि को किडनी ऑफ लैंड स्केप कहते हैं। प्रभागीय वन अधिकारी वीके मिश्रा ने कहा कि जिस तरह से अगर मोबाइल चार्ज नहीं हो तो मोबाइल बंद हो जाता है ठीक उसी प्रकार आर्द्र भूमियां अथवा वेटलैंड्स पर्यावरण को चार्ज करते हैं और उन्हें उसे संतुलित बनाए रखने में बड़ा योगदान देते हैं। कार्यक्रम में स्कूली बच्चों के बीच निबंध, चित्रकला व वाद-विवाद प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। प्रतियोगिता में बच्चों ने आर्द्र भूमि, पर्यावरण संरक्षण व पक्षियों के बचाव को चित्रों में उकेरा। प्रतियोगिता में प्रतिभाग लेने वाले बच्चों को ट्रॉफी मेडल व प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में विशेष रूप से आमंत्रित पक्षी विशेषज्ञ डॉ. निकेत मिश्रा ने पक्षियों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम में क्षेत्रीय वन अधिकारी परवेज शहजाद, वन दरोगा प्रद्युमन भदौरिया, लख्मण दास तथा वन रक्षक मनोज श्रीवास मौजूद रहे।