झांसी जिला पंचायत पर पहली बार काबिज भाजपा
सब हेड... शुरूआत में कांग्रेस और बाद में समाजवादी पार्टी का रहा दबदबा
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। जिला परिषद से जिला पंचायत तक के इतिहास में भारतीय जनता पार्टी पहली बार अध्यक्ष की कुर्सी पर काबिज होने जा रही है। जबकि, शुरुआती दौर में कांग्रेस का कुर्सी पर दबदबा रहा और बाद में समाजवादी पार्टी जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी हथियाये रही। बीच में बसपा को दो बार ही मौका मिला।
आजादी के बाद ग्रामीण इलाकों के समग्र विकास के लिए जिला परिषद का गठन किया गया था। इसका पहला चुनाव सितंबर 1962 में हुआ था। कांग्रेस के डॉ. गोविंद दास रिछारिया निर्विरोध अध्यक्ष निर्वाचित हुए थे। वे लगातार आठ साल 1970 तक इस पद पर रहे। इसके बाद चार साल तक चुनाव नहीं हुए और जिलाधिकारी जिला परिषद के प्रशासक रहे। 1974 में हुए चुनाव में विश्वनाथ शर्मा अध्यक्ष बने। 1977 में इमरजेंसी लागू होने पर उनका कार्यकाल खत्म हो गया था। इमरजेंसी खत्म होने के लगातार 12 सालों तक जिला परिषद के चुनाव नहीं हुए और जिलाधिकारी प्रशासक बने रहे। इसके बाद 1989 में चुनाव हुआ, जिसमें कांग्रेस के राजीव रिछारिया ने जीत हासिल की और वे 1995 तक अध्यक्ष रहे। इसी समय देश में पंचायती राज व्यवस्था लागू हो गई और जिला परिषद को जिला पंचायत में तब्दील कर दिया गया।
जिला पंचायत अध्यक्ष का पहला चुनाव 1995 में हुआ, जिसमें समाजवादी पार्टी के डॉ. सुशील कुरैचिया ने जीत हासिल की। साल 2000 में हुए चुनाव में ये सीट बसपा के खाते में चली गई और बसपा के राकेश पाल अध्यक्ष निर्वाचित हुए। लेकिन, 2005 में हुए चुनाव ने सपा ने बसपा को जवाब देते हुए ये सीट छीन ली और पूर्व अध्यक्ष राकेश पाल की पत्नी दयावती पाल अध्यक्ष निर्वाचित हुईं। लेकिन, 2010 में हुए चुनाव में बसपा ने समाजवादी पार्टी को कुर्सी से बेदखल कर दिया। बसपा की वंदना पाठक जिला पंचायत अध्यक्ष निर्वाचित हुईं। लेकिन, वो अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पाईं। प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के बाद वंदना पाठक के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया। इसके बाद 2013 में हुए चुनाव में समाजवादी पार्टी की मीरा विष्णु राय ने जिला पंचायत के अध्यक्ष की कमान संभाली। इसके अगले चुनाव में भी सपा ने जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी पर अपना कब्जा बरकरार रखा। 2015 के चुनाव में समाजवादी पार्टी की प्रतिमा यादव ने जीत हासिल की।
इस बार ये पहला मौका है, जब भारतीय जनता पार्टी जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी पर काबिज होने जा रही है। भाजपा के प्रत्याशी पवन कुमार गौतम का जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर निर्विरोध निर्वाचन तय हो गया है। 29 जून को नाम वापसी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद पवन को जीत का प्रमाण पत्र सौंप दिया जाएगा।
सत्ता के साथ रही सीट
झांसी। जिला परिषद और उसके बाद जिला पंचायत के अध्यक्ष की कुर्सी हमेशा सत्ता के पाले में ही रही। प्रदेश में जब कांग्रेस की सरकार थी, तो कांग्रेस के उम्मीदवार ही इस सीट पर हावी रहे। समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी की सरकार में इन पार्टियों के नुमाइंदों ने ही जिला पंचायत चलाई। जबकि, हाल ही में हुए चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के लिए समीकरण सभी अनुकूल थे। इसी का नतीजा रहा कि भाजपा अपने प्रत्याशी का निर्विरोध निर्वाचन कराने में कामयाब हो गई। हालांकि, भाजपा के पास जिला पंचायत के सदन में बहुमत नहीं है। 24 सदस्यीय जिला पंचायत में उसके सिर्फ नौ सदस्य हैं, जबकि बहुमत के लिए 13 सदस्यों की दरकार है।