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छापेमारी के डर से नहीं खुल रहीं यूरिया की दुकान

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झांसी। झांसी समेत कई अन्य जनपदों में खाद की कालाबाजारी का मामला सामने आने के बाद प्रदेश सरकार ने इस पर सख्ती के निर्देश दिए हुए थे। प्रशासनिक अमले ने भी तेजी दिखाते हुए कई टीमें बनाकर तबाड़तोड़ कार्रवाई शुरू करा दी। प्रशासन के सख्त रवैये को देखते हुए तमाम दुकानदारों ने इस बीच अपनी दुकान ही बंद रखने में भलाई समझी।
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आकड़ों के मुताबिक खरीफ 2018 में बाजार से 2272 एमटी यूरिया बेची गई। इसी तरह पिछले वर्ष 2070 एमटी यूरिया बिकी लेकिन, अबकी यह आकड़ा एकबारगी गिर गया। अभी तक दुकानदारों ने सिर्फ 435 एमटी खाद ही बेची है जो पिछली दफे से करीब चार गुना से भी अधिक कम है। इस बीच सहकारी समितियों से ही किसानों को खाद मिली। अभी तक सहकारी समितियों से कुल 990 एमटी यूरिया किसानों को दी जा चुकी। इस तरह अभी तक 1425 एमटी यूरिया की ही यहां खपत हुई है। यूरिया का अधिकांश इस्तेमाल धान की फसल में होता है। अधिकांश यूरिया की खपत मोंठ एवं आसपास के इलाकों में ही हुई है। सहायक आयुक्त एवं सहायक निबंधक सहाकारिता केपी शुक्ला के मुताबिक 1502 एमटी यूरिया का लक्ष्य तय है। इसके मुताबिक यहां के लिए यूरिया पर्याप्त उपलब्ध है।
21 दुकानें की जा चुकी निलंबित
खाद बिक्री में गड़बड़ी के आरोप में अभी तक कृषि विभाग जनपद की 21 दुकानों के लाइसेंस निलंबित कर चुका जबकि मिलावट की आशंका में पांच दर्जन से अधिक नमूने भी लिए गए हैं। जनपद में खाद की कुल 285 प्राइवेट एवं 58 सहकारी समितियों के केंद्र हैं।
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