झांसी। अहिंसा के दूत राष्ट्रपिता महात्मा गांधी तीन बार झांसी आए और लोगों को अहिंसा का रास्ता अपनाकर आजादी की लड़ाई लड़ने के लिए प्रेरित किया। यही वजह है कि वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई की नगरी ने बापू को अपना भरपूर प्यार दिया। सरस्वती इंडस्ट्रियल इंटर कालेज में आज भी उनकी याद में आकर्षक प्रतिमा मौजूद है, जो वर्ष 1973 -74 में कालेज के तत्कालीन छात्र संघ ने स्थापित करायी थी। बापू ने कालेज में ठहरकर असहयोग आंदोलन की रणनीति तैयार की थी और विदेशी वस्त्रों की होली जलवायी थी।
प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की अमर दीपशिखा रानी लक्ष्मीबाई, चंद्रशेखर आजाद सहित कई क्रांतिकारियों की भूमि रही झांसी से राष्ट्रपिता को खासा लगाव था। साहित्यकार जानकी शरण वर्मा की पुस्तक कालजयी महामानव गांधी के अनुसार वह 1920 में झांसी आए थे। उन्होंने विदेशी वस्त्रों की होली जलवायी थी। लोगों को आजादी क ी लड़ाई के लिए प्रेरित किया था। उन्हें लोगों से व्यापक समर्थन मिला था। इससे उत्साहित राष्ट्रपिता दूसरी बार 1921 फिर 1929 में झांसी आए थे। यात्राओं के दौरान उनके साथ कई बडे़ नेता भी रहे थे। बापू की यादों को सहेजते हुए सरस्वती पाठशाला इंडस्ट्रियल इंटर कालेज के गांधी उद्यान में तत्कालीन छात्र संघ ने सन 1973 - 74 में प्रतिमा स्थापित करायी थी। इसमें राष्ट्रपिता एक हाथ में किताब और एक हाथ में लाठी लेकर चल रहे हैं। यह प्रतिमा आज भी सजीव नजर आती है। हालांकि रंग रोगन के अभाव में प्रतिमा स्थल पर शब्द मिट रहे हैं। इस संबंध में कालेज प्राचार्य मनोज मिश्रा ने बताया कि बजट का अभाव रहता है लेकिन जल्द ही उद्यान का विकास कार्य कराया जाएगा।