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पिता के फंड को लेकर चक्कर काट रहे बच्चे

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मऊरानीपुर। तीन साल पहले पिता की मौत के बाद बेसहारा हो चुके बच्चों की तरफ पिता का ही विभाग असंवेदनशील बना हुआ है। पीड़ित बच्चों ने बताया कि तीन साल से उनको उनके पिता के फंड की बकाया राशि के लिए परेशान किया जा रहा है। इनकी मां की भी 2009 में स्टोव फटने के कारण मौत हो चुकी है। आज इन बच्चों की आर्थिक स्थिति दयनीय बनी हुई है।
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20 सितंबर 2017 को विद्युत विभाग में श्रमिक भरत बहादुर की विभागीय कार्य के दौरान दुर्घटना में मृत्यु हो गई थी। उनकी मृत्यु के दो वर्ष बाद समाचार पत्रों में खबर को प्रमुखता से लिए जाने के बाद शासन प्रशासन हरकत में आया। तत्कालीन उप जिलाधिकारी के द्वारा मामले का संज्ञान लेते हुए विद्युत विभाग से बात की गई तो वहीं विभाग द्वारा आर्थिक मदद के तौर पर उनको करीब एक लाख रुपये से अधिक की राशि उनको प्रदान की गई। रोशनी (18), सनी (17) और पलक (15)
ने बताया कि इसके बाद विभाग द्वारा उनकी कोई सुध नहीं ली गई। सहायता राशि भी खत्म हो चुकी है। तीन माह पहले विभाग में पिता के फंड की बकाया राशि दिलाने के लिए प्रार्थना पत्र दिया। लेकिन विभाग द्वारा उन पर कोई सुनवाई नहीं की जा रही है। वह कार्यालय के दफ्तर काटने के लिए मजबूर हैं।
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भूख से व्याकुल बच्चे पड़ोसियों की मदद पर निर्भर है। दो वक्त की रोटी के लिए फिर से संपन्न लोगों का मुंह ताक रहे हैं। बड़ी बेटी रोशनी ने बताया कि पैसे खत्म हो जाने के बाद अब कोई उनकी मदद को तैयार नहीं है। ना तो किराना वाला उन्हें उधार सामान देने को राजी है ना ही दूध वाला। कई दिनों से वह सब्जी तक नहीं खरीद पा रहे हैं। नगरवासियों भी ने उच्च अधिकारियों का ध्यान आकृष्ट कराया है।
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