झांसी। बुंदेलखंड में 12 कीट ऐसे हैं, जो यहां की फसलों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। कोई पौधों की जड़ों को खाता है तो कोई पत्तियों को चट कर जाता है। कुछ कीट तो ऐसे भी हैं, जिन्हें समय रहते नहीं नष्ट किया गया तो ये 20 से लेकर 50 प्रतिशत तक उपज कम कर देते हैं। जिससे किसानों को भारी नुकसान हो रहा है।
रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों का कहना है कि 12 कीट ऐसे हैं, जिनका फसलों पर सर्वाधिक प्रकोप है। कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अरविंद कुमार ने बताया कि फसल में लगे किसी भी कीट का समय रहते उपचार करना जरूरी है। उन्होंने बताया कि आरा मक्खी 30 प्रतिशत तक सरसों की फसल तो दीमक किसी भी फसल की उपज 50 प्रतिशत तक कम कर सकती है। वहीं, एनटोमोलॉजी विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. ऊषा मौर्य ने बताया कि समय-समय पर विभाग के विशेषज्ञ किसानों को जाकर जागरूक करते हैं।
ये हैं वो कीट
- काला माहू: ये मटर के पौधों की पत्तियों, तनों और फूलों से रस चूसता है। इससे पत्तियां पीली होकर सूखकर गिर जाती हैं। ये कीट एक शहद जैसे पदार्थ का स्त्राव करता है। जिन पर काले रंग की फफूंद लग जाती है।
दीमक: ये लगभग सभी प्रकार की फसलों को नुकसान पहुंचाता है। यह कीट जमीन में सुरंग बनाकर रहता है। पौधों की जड़ों को खाता है। इससे उपज में 48-50 प्रतिशत तक की कमी आ जाती है।
- बिहार हेयरी कैटरपिलर: ये मूंग, उर्द आदि में लगता है। इसका लार्वा पत्तियों को उसकी निचली सतह से खुरच कर खाता है।
- फल मक्खी: ये अमरूद, कद्दू वर्गीय सब्जियां, आम को नुकसान पहुंचाती है। ये कीट फलों की गुणवत्ता और स्वाद को भी खराब कर देती है।
- आरा मक्खी: ये सरसों की फसल की उपज 20-30 प्रतिशत तक कम कर सकता है। ये कीट ज्यादातर फसल की अंकुरित अवस्था के समय आक्रमण करता है।
सैनिक कीट (फॉल आर्मीवर्म): इस कीट की पहली पसंद मक्का है मगर ये चावल, ज्वार, बाजरा, गन्ना, सब्जियों, कॉटन समेत 80 से अधिक पौधों की प्रजातियों को खाता है।
फलछेदक: ये टमाटर को अधिक नुकसान पहुंचाता है। इसकी इल्ली कोमल पत्तियों को खाती है।
चना फलीभेदक: चना की वानस्पतिक अवस्था से लेकर फली बनने तक इसका प्रकोप होने से 90 फीसदी तक नुकसान हो जाता है। इल्ली कोमल पत्तियों को खाती है।
माहू: ये कीट पौधों के कोमल तनों, पत्तियों, फूलों और नई फलियों से रस चूसकर उसे कमजोर व क्षतिग्रस्त कर देता है।
- चितकबरा (पेंटेड बग): ये कीट सरसों और मूंग को नुकसान पहुंचाता है। ये काले रंग का होता है और इस पर पीले, नारंगी धब्बे होते हैं। पौधों से रस चूसते हैं, इससे उनकी वृद्धि रुक जाती है।
- गंधी बग: धान की फसल में परागण के बाद ये कीट दानों युक्त बालियों पर आक्रमण करते हैं। दानों में बने दूध को चूसते हैं। क्षतिग्रस्त दानों पर भूरे रंग के धब्बे हो जाते हैं।
- सफेद मक्खी: ये पौधों की पत्तियों से रस चूसकर उसको क्षति पहुंचाती है। ज्यादा प्रकोप होने पर पत्तियां मुरझाकर गिर जाती हैं।