झांसी। किसानों को दो घंटे अधिक बिजली क्या मिल गई शोर मच गया। जांच बैठा दी गई। एसडीओ और जेई निलंबित कर दिए गए। लेकिन यहां सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि आखिर बिजली कम देने वालों पर कार्रवाई क्यों नहीं होती। ग्रामीण क्षेत्रों को बीस घंटे बिजली देने का आदेश हैं लेकिन बुंदेलखंड के गांवों में तो दस घंटे भी लगातार मिल जाए तो बड़ी बात है। किसान फसलों की सिंचाई तक नहीं कर पा रहे हैं। बिजली को लेकर आए दिन प्रदर्शन दो रहे हैं। 8 जनवरी को झांसी पहुंचे प्रभारी मंत्री रामनरेश अग्निहोत्री के सामने विधायकों ने भी लड़खड़ाई आपूर्ति का मुद्दा उठाया था।
झांसी मुख्यालय से 21 किलोमीटर दूर बरुआसागर सब स्टेशन से करीब पचास गांव और बरुआसागर कस्बे को बिजली मिलती है। इस सब स्टेशन से करीब 10 हजार बिजली कनेक्शन हैं। रोस्टर के मुताबिक ग्रामीण इलाकों को 20 घंटे और कस्बे को 22 घंटे बिजली दी जानी चाहिए। 19 जनवरी को इस बिजली घर के निरीक्षण के दौरान दिसंबर (2019) और जनवरी की लॉगसीट एमडी ने देखी थी। यहां दो घंटे अधिक सप्लाई का मामला सामने आया। इस पर कार्रवाई की गई। लेकिन इस क्षेत्र के किसान लगातार बिजली व्यवस्था में सुधार की मांग उठा रहे हैं। समय से ट्रांसफारमर नहीं मिल पाते हैं। स्थिति यह है किसान फसलों की सिंचाई नहीं कर पा रहे।
एसडीओ शिवकुमार कुशवाहा का कहना है कि उनको 20 घंटे बिजली देने का कोई लिखित आदेश नहीं दिया गया है। जितनी बिजली आपूर्ति देते हैं, उसकी प्रतिदिन जानकारी उच्च अधिकारियों को दी जाती है।
अवर अभियंता एसके सेन का कहना है कि हाइटेंशन लाइन से जितनी बिजली मिलती है, उसे सुचारु रूप से आगे बढ़ाया जाता है। स्थानीय स्तर पर कटौती का कोई आदेश नहीं है। साथ ही उच्च अधिकारी जब भी निरीक्षण करने के लिए सबस्टेशन पर आते हैं, लॉग सीट की जांच के बाद उस पर हस्ताक्षर करते हैं। कभी उन्होंने नहीं टोका।