फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

असफल होने के बाद भी नहीं मानी हार, दूसरे प्रयास में आईएएस बने धीरज

विज्ञापन
विज्ञापन
झांसी। झांसी के एक होनहार ने आईएएस परीक्षा में सफलता प्राप्त की है। रोज आठ से दस घंटे की कड़ी मेहनत और लगन से धीरज यादव ने संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा में 417वीं रैंक पाकर जिले का नाम रोशन किया है। धीरज का कहना है कि वे देश और समाज के लिए काम करेंगे। पिछले साल असफल होने के बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी और दूसरे प्रयास में सफलता प्राप्त की।
विज्ञापन

महानगर के आशिक चौराहा नई बस्ती निवासी जलसंस्थान के कर्मचारी कैलाश यादव और मां सुशीला यादव के बेटे धीरज यादव की प्रारंभिक शिक्षा महानगर के क्राइस्ट द किंग स्कूल से हुई। इसके बाद उन्होंने आईआईटी जेईई की परीक्षा उत्तीर्ण की। इसके बाद उन्होंने आईआईटी बीएचयू से कंप्यूटर साइंस में बीटेक किया। बीटेक करने के बाद उनका प्लेसमेंट एक कंपनी में हो गया था, लेकिन उन्होंने सिविल सर्विस में जाने की ठानी। इसके लिए उन्होंने झांसी आकर परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी। धीरज की बहन दीपशिखा बताती हैं कि उन्होंने रोज आठ से दस घंटे पढ़ाई की। साथ ही हर टॉपिक को पूरी मजबूती से तैयार किया। पिछले साल 2020 में धीरज का चयन उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की पीसीएस परीक्षा में हो गया था। इसके लिए मेडिकल और अन्य प्रक्रियाएं चल रहीं थीं कि शुक्रवार को यूपीएससी का परीक्षा परिणाम जारी हुआ। जिसमें धीरज यादव ने 417 रैंक प्राप्त की। परिणाम जारी होने के बाद धीरज को बधाई देने वालों का तांता लग गया। धीरज बताते हैं कि पिछले साल भी उन्होंने आईएएस मेन परीक्षा उत्तीर्ण कर ली थी, लेकिन साक्षात्कार में वे रह गए थे। मगर उनका हौसला कम नहीं हुआ। धीरज के चयन पर भाई अभिषेक यादव, बहनोई रोहित यादव, बहन दीपशिखा यादव ने मिठाई खिलाकर खुशी मनाई।
आशावादी नजरिया रखें
धीरज बताते हैं कि यूपीएससी सिविल सर्विसेज परीक्षा की तैयारी के दौरान मेहनत और लगन के साथ आशावादी नजरिया रखने की जरुरत है। कई बार परीक्षा में असफल होने पर विद्यार्थी निराश हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि धैर्य के साथ लगातार मेहनत करते रहें। ज्यादा पढ़ाई करें, लेकिन तनाव बिल्कुल न लें।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें