इटावा के बहुचर्चित कथावाचक कांड में कथावाचकों के बयान दर्ज करने में ही पुलिस चकरधिन्नी बन गई है। सात दिन में तीन बार इटावा जा चुकी पुलिस के सामने कथावाचक नहीं आ रहे हैं। उनके सामने न आने पर पुलिस ने बृहस्पतिवार को दोनों के घर के बाहर नोटिस चस्पा कर दिया था। वहीं, शनिवार को दोनों कथावाचक अग्रिम जमानत के लिए इटावा के कोर्ट जा पहुंचे। दोनों एक मामले में आरोपी हैं। इस वजह से ही दोनों पुलिस के सामने आने से कतरा रहे हैं।
21 जून को इटावा के दादरपुर गांव में अपनी जाति छुपाने के आरोप में कथावाचक मुकुट मणि और संत सिंह की पिटाई कर दी गई थी। अपमानित करने के लिए मुकुट मणि की चोटी काट दी गई। वीडियो सामने आने के बाद संत सिंह की तहरीर पर इटावा पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर ली। उधर, यजमान पक्ष ने भी गंभीर आरोप लगाते हुए दोनों कथावाचकों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करा दी। 28 जून को पूंछ इंस्पेक्टर जेपी पाल को विवेचना सौंपी गई।
कथावाचकों के बयान दर्ज कराने के लिए तीन बार पुलिस इटावा जा चुकी है, लेकिन दोनों घर में नहीं मिले। उनके सामने न आने पर पुलिस ने तीन जून को उनके घर के बाहर नोटिस चस्पा कर दिया। पुलिस अफसरों का कहना है कि एक मामले में नामजद होने से दोनों पुलिस के सामने आने से कतरा रहे हैं। पुलिस को 90 दिन में विवेचना पूरी कर आरोप पत्र कोर्ट में पेश करना होगा।