संवाद न्यूज एजेंसी
एरच। प्राचीन नरसिंह तालाब देखरेख के अभाव में पहचान खो रहा है। वर्तमान में यह अधिकतर समय सूखा ही रहता है। नगर की सुंदरता बढ़ाने के साथ तालाब आसपास के क्षेत्र का जल स्तर भी बरकरार रखने में सहायक था। लोगों ने कहा कि एक दशक से अधिक समय से विलुप्त हो रहे इस तालाब को संवारने की जरूरत है। एरच में 20 हजार लोगों की आबादी है। यहां एक ही प्राचीन तालाब है जो उपेक्षा के कारण सूखा पड़ा है। तालाब में बारिश के समय ही पानी भरता है, लेकिन कुछ दिनों में ही पूरा पानी सूख जाता है। तालाब के खाली रहने से आसपास के मोहल्लों का जल स्तर भी नीचे चला जाता है। इस वजह से गर्मी के मौसम में हैंडपंप से भी पानी नहीं मिलता और लोगों को पेयजल समस्या से जूझना पड़ता है।
स्थानीय निवासियों ने बताया कि तालाब पर नगर की महिलाएं रक्षा बंधन और अन्य त्योहारों पर पूजा करने आती हैं। नरसिंह भगवान मंदिर के नाम से प्रसिद्ध इस तालाब से लोगों की आस्था और श्रद्धा भी जुड़ी है। लोगों ने कहा कि तालाब के सुंदरीकरण के लिए शासन-प्रशासन से कई बार मांग की गई, लेकिन कुछ नहीं हुआ। उनका कहना है कि तालाब के हालत बदलेगी तो क्षेत्र मे पानी का संकट दूर होने के साथ आसपास का क्षेत्र हराभरा रहेगा। वहीं तालाब की तरफ ध्यान नहीं दिया गया तो नगर की प्राचीन धरोहर का अस्तित्व समाप्त हो जाएगा।
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वर्जन
नरसिंह तालाब को अमृत सरोवर योजना में शामिल करने के लिए पहल की जा रही है। योजना में शामिल होने के बाद राशि उपलब्ध होते ही तालाब का सुंदरीकरण कराया जाएगा। - अरविंद कुमार, अधिशासी अधिकारी, नगर पंचायत एरच