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डिफेंस कॉरिडोर में ग्रहण बनी एरच बांध बहुउद्देशीय परियोजना

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बांध परियोजना - फोटो : अमर उजाला
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डिफेंस कॉरिडोर के लिए एरच बांध बहुउद्देश्यीय परियोजना ग्रहण बनती जा रही है। कॉरिडोर के लिए तेजी से काम चल रहा है, जबकि बांध का निर्माण घोटाले की जांच में फंसता जा रहा है।

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डिफेंस कॉरिडोर के लिए जमीन अधिग्रहण का काम तेजी से जारी है। सरकार की योजना है कि दो साल के भीतर यहां इकाइयों की स्थापना का काम शुरू कर दिया जाए। लेकिन, ये तभी संभव होगा जब एरच बांध बहुउद्देश्यीय परियोजना का काम पूरा हो जाएगा।

जबकि, बांध परियोजना घोटाले की जांच में फंसी हुई है। हाल ही में आर्थिक अपराध जांच शाखा (ईओडब्ल्यू) ने एरच बांध परियोजना में 16 करोड़ से अधिक के घपले की प्रारंभिक जांच पूरी करने के बाद पूरी परियोजना में अनियमितता की पड़ताल किया जाना जरूरी बताया है। शासन को जो रिपोर्ट सौंपी गई है उसमें पूरी परियोजना में अनियमितता की जांच की सिफारिश की गई है। इससे अब बांध का काम दोबारा जल्द शुरू होता दिखाई नहीं दे रहा है।
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मालूम हो कि नावार्ड से वित्त पोषित पारीछा बांध से 40 किलोमीटर नीचे एरच क्षेत्र के जुझार गांव में बांध का निर्माण किया जा रहा है। 612 करोड़ की लागत से बनने वाले इस बांध में नावार्ड को 498 करोड़ रुपये देना है, बाकी का बजट प्रदेश सरकार देगी। साल 2016 में बांध निर्माण के लिए 367 करोड़ की तीन किस्तें जारी की जा चुकी हैं।

बजट के लगातार मिलने से 2017 में विधानसभा चुनाव से पहले बांध का 50 फीसदी काम पूरा कर लिया गया था। सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने साल 2018 में बांध का निर्माण पूरा होने का लक्ष्य बनाया था। मगर, 2017 में प्रदेश में भाजपा सरकार के बनते ही बांध निर्माण में हो रही वित्तीय अनियमितताओं की जांच शुरू कर दी गई। साथ ही रुड़की विश्वविद्यालय बांध की आवश्यकता पर भी जांच कर रहा है, लेकिन दो साल बीतने के बाद भी यह जांचें पूरी नहीं हो सकी हैं। इससे बांध का निर्माण जस का तस पड़ा है।

62 मिलियन घन मीटर पानी हो सकेगा एकत्रित
मध्य प्रदेश के भोपाल से निकली बेतवा नदी का पानी यूपी में सबसे पहले ललितपुर में बने राजघाट बांध व माताटीला बांध पर रोका जाता है। इसके बाद झांसी जनपद में बने सुकुवां-ढुकुवां बांध व पारीछा बांध पर पानी का संग्रह होता है। इन चारों बांधों के भरने के बाद भी वर्षा ऋतु में 11 मिलियन घन मीटर पानी नदी में बेकार बह जाता है। इस पानी के सदुपयोग के लिए ही इस बांध का निर्माण किया जा रहा है।

नदी में बहने वाला यह पानी आगे उरई होते हुए हमीरपुर से निकली यमुना नदी में मिल जाता है। एरच बांध को बनाने का मुख्य उद्देश्य आसपास के पांच ब्लाकों (बामौर, गुरसरांय, बड़ागांव, चिरगांव व मोंठ) के 378 गांवों में पेयजल पहुंचाना है। अभी इन गांवों के लोग कुएं व हैंडपंप के पानी पर निर्भर हैं। गर्मियों के दिनों में जलस्तर गिरने पर इन गांवों में पेयजल संकट हो जाता है।


इस बांध की कुल क्षमता 62 मिलियन घन मीटर (एमसीएम) होगी व इसकी उपयोग क्षमता 56 मिलियन घन मीटर होगी। बांध 19 मीटर ऊंचा व 1400 मीटर लंबाई में बनाया जाएगा, इसमें करीब बीस गेट होंगे। बांध का तीस एमसीएम पानी पेयजल व दस एमसीएम पानी से आसपास क्षेत्र की 1850 हेक्टेयर भूमि सिंचित होगी। 16 एमसीएम पानी का उपयोग नहर के किनारे के खेतों में स्प्रिंकलर सिंचाई में प्रयोग होगा। बांध के बगल से कुछ पानी लगातार बहता रहेगा। इससे नदी सूख नहीं पाएगी और उसका अस्तित्व हमेशा बना रहेगा।

पिछले दिनों प्रमुख सचिव गृह और यूपीडा के महानिदेशक अवनीश अवस्थी ने बांध का निरीक्षण किया था। उन्होंने जांच कर रहीं दोनों एजेंसियों व सिंचाई विभाग के अधिकारियों से बात कर जांच जल्द पूरा कराने के निर्देश दिए थे। ऐसे में उम्मीद है कि जल्द जांच पूरी हो जाएगी।
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- शिवसहाय अवस्थी, जिलाधिकारी

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