झांसी। बीएड प्रवेश परीक्षा में झांसी का नाम रोशन करने वालीं भावना मिश्रा सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था सुधारना चाहती हैं। यही सपना शिवम चतुर्वेदी का भी है। दोनों ही टॉपर आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों को बेहतर शिक्षा देने के लिए प्रतिबद्ध हैं। वहीं, कोरोना के चलते हुए लॉकडाउन में दोनों मेधावियों ने ज्यादा से ज्यादा समय पढ़ाई को दिया। इसी वजह से ये सफलता मिली है।
बीएड प्रवेश परीक्षा में महिला वर्ग की टॉपर दतिया गेट बाहर निवासी अमर उजाला के पत्रकार राजेंद्र मिश्रा की बेटी भावना मिश्रा ने कहा कि वो वंचित बच्चों को शिक्षित करना चाहती हैं। मैंने ऐसे बच्चों को नि:शुल्क ट्यूशन भी दिया है। अक्सर यह देखा है कि सरकारी स्कूलों में शिक्षा व्यवस्था काफी बिगड़ी हुई है। कोई पढ़ना और पढ़ाना नहीं चाहता है। मैं सरकारी स्कूल में शिक्षक बनकर बदलाव लाने का प्रयास करना चाहती हूं। क्योंकि बिना शिक्षा किसी भी क्षेत्र में सफलता नहीं मिल सकती है। मैं पिता राजेंद्र मिश्रा से प्रभावित हूं, जो पेशे से पत्रकार हैं। किंतु पहले वे भी ऐसे बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा देते थे। मां रमा मिश्रा गृहणी हैं, जो मुझे प्रेरित करती रहती हैं। भावना शुरू से ही मेधावी रही हैं। मौजूदा समय में वह बुंदेलखंड विश्वविद्यालय से एमएससी केमिस्ट्री से कर रही हैं। बीएड परीक्षा में क्वालिफाई करने के लिए उन्होंने रोजाना आठ घंटे तक पढ़ाई की।
वहीं, शिवम ने बताया कि वह प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं। बीएड के साथ-साथ पीजीएल की भी परीक्षा दी है। उन्होंने कभी कोचिंग से पढ़ाई नहीं की। यूट्यूब से ही पढ़ते रहे। लॉकडाउन रहा तो पढ़ने का भी खूब मौका मिला। शिवम ने बताया कि वह शिक्षक बनना चाहते हैं। उनकी बहन शिवानी चतुर्वेदी ने भी बीएड की परीक्षा दी थी। उनके 400 मेें 322 नंबर आए हैं।