अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। गर्मी के दिनों में बासी खाना खाने, कटे हुए फल और दूषित पानी का सेवन करने से लोग बीमार पड़ रहे हैं। दो हफ्ते में ही ओपीडी में डायरिया के मरीजों की संख्या लगभग 20 फीसदी बढ़ गई है। कई मरीज बेहोशी जैसी हालत में भी अस्पताल में भर्ती हो रहे हैं।
बच्चों को तीन या उससे अधिक दस्त हों तो डायरिया हो सकता है। डायरिया के बाद बहुत अधिक निर्जलीकरण, खाना-पीना बंद कर देना, बार-बार उल्टियां होना, सुस्त पड़ जाना, दौरे आना, यूरिन रुक जाना, आंखों का एकदम धंस जाना, शरीर का शिथिल पड़ जाना आदि कारणों से मरीज को अस्पताल में भर्ती करना पड़ जाता है। देश में पांच साल से कम उम्र के बच्चों की मौत का दूसरा मुख्य कारण डायरिया है। मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विभागाध्यक्ष डॉ. ओमशंकर चौरसिया ने बताया कि समय पर ओआरएस पिलाकर डायरिया से होने वाली मौतों को रोका जा सकता है।
ओआरएस डायरिया के लिए एक अमृत घोल के समान होता है। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रमोद गुप्ता ने बताया कि ओपीडी में आने वाले डायरिया पीड़ित बच्चों की संख्या काफी बढ़ गई है। दो सप्ताह पहले तक ओपीडी में प्रतिदिन 100 में जहां 25 से 30 डायरिया के मरीज दिखाने के लिए आते थे। अब 30 से 40 बच्चे रोजाना इलाज कराने आ रहे हैं। बहुत अधिक दस्त लगने से शरीर में पानी की अत्यधिक कमी हो जाने से कुछ मरीज बेहोशी जैसी स्थिति में भर्ती हो रहे हैं। क्रिटिकल केयर एक्सपर्ट डॉ. श्वेतांक शर्मा ने बताया कि डायरिया पीड़ित मरीज के शरीर में पानी की कमी हो जाने से ब्लड प्रेशर कम होने लगता है। इससे किडनी भी काम करना बंद कर देती है। कहा कि दस्त लगना शुरू होते ही पर्याप्त मात्रा में पानी पीना शुरू कर दें। विशेषज्ञ से चिकित्सीय सलाह भी लें।
डायरिया के लक्षण
.......................
- बुखार आना
- दस्त लगना
- मिचली और उल्टी आना
- पेट के निचले भाग में अधिक पीड़ा होना
ऐसे करें बचाव
..................
- पोषक आहार लें।
- बच्चों का समय से टीकाकरण।
- स्वच्छ पेयजल का उपयोग करें।
- खाने से पहले और बाद में हाथ धोएं।