झांसी। कोरोना काल में पिछले 14 महीनों में 125 से ज्यादा गर्भवतियों ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। सरकारी रिकॉर्ड में अप्रैल 2020 से लेकर मई 2021 तक 90 मौतें दर्ज हुई हैं। मंडल में सबसे बुरी स्थिति झांसी जनपद की है, जहां सबसे ज्यादा मातृ-मृत्यु दर्ज हुई हैं।
कोरोना काल कोविड संक्रमित ही नहीं दूसरे मरीजों पर भी काफी भारी पड़ा है। इन्हीं में गर्भवती महिलाएं भी शामिल हैं। हर माह की 9 तारीख को प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान दिवस मनाया जा रहा है। ऐसे में सभी गर्भवतियों की जांच और उनमें उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था को चिह्नित करना होता है। पिछले साल लॉकडाउन में तीन महीने तक यह पूरी तरह बंद रहा। वहीं, इस बार कोरोना की दूसरी लहर के रफ्तार पकड़ने के बाद गर्भवती महिलाओं की इस दिवस पर उपस्थिति कम हो गई। इससे नियमित जांचें व इलाज भी प्रभावित हुआ। ऐसे में आशंका है कि कुछ मौतों का कारण ये भी रहा होगा। हालांकि, स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी इससे साफ इंकार कर रहे हैं।
ऑडिट पर एडी दर्ज करा चुकीं आपत्ति
स्वास्थ्य विभाग की तरफ से लगातार मातृ-मृत्यु का ऑडिट कराया जाता है। हाल ही में एडी की तरफ से बुलाई गई समीक्षा बैठक में 85 मातृ मृत्यु में 43 अन्य कारणों से दर्शायी गई थी। इस पर एडी की तरफ से आपत्ति दर्ज कराते हुए मृत्यु का मूल कारण खोजने के निर्देश दिए गए थे।
गर्भावस्था के दौरान इनका रखें ध्यान
- पहली तिमाही पर स्वास्थ्य केंद्र में पंजीकरण कराएं।
- पंजीकरण के बाद कम से कम तीन बार प्रसव पूर्व जांच कराएं।
- हर जांच के समय रक्तचाप, खून व पेशाब की जांच कर कराएं।
- वजन जरूर कराएं। गर्भावस्था के समय कम से कम नौ से 11 किलो वजन बढ़ना चाहिए।
- गर्भावस्था के अंतिम छह महीने में हर माह कम से कम एक किलो वजन बढ़ना चाहिए।
- कम से कम छह महीने तक प्रतिदिन आयरन, फोलिक एसिड की एक गोली जरूर खाएं।
- पहली तिमाही के बाद कम से कम छह महीने के लिए रोज कैल्शियम की दो गोलियां लें।
गर्भवती महिलाओं की हर संभव जांच और उपचार किया जा रहा है। प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान दिवस का लाभ सभी गर्भवती महिलाएं उठाएं। कोरोना काल में जरूर अभियान पर असर पड़ा मगर अब व्यवस्था पूरी तरह पटरी पर आ चुकी है। - डॉ. राजकिशोर, नोडल अधिकारी, मातृ-मृत्यु समीक्षा कार्यक्रम।
वैक्सीन लगने के 14 दिन बाद भी ब्लड डोनेट कर सकते हैं।