झांसी। कारोना काल के दौरान बिना हाजिरी दर्ज कराए वेतन-भत्ता उठाए जाने के मामले की जांच झांसी मंडल में भी शुरू करा दी गई। डीआरएम संदीप माथुर ने इसकी जांच एडीआरएम को सौंपी है। उन्होंने टीटीई एवं रर्निंग स्टॉफ से जुड़े रोस्टर रजिस्टर समेत अन्य दस्तावेज तलब करके जांच शुरू कर दी है।
एनसीआर जोन के प्रयागराज मंडल में फर्जीवाड़े के खुलासे के बाद इसकी आंच झांसी तक भी पहुंच चुकी है। यहां करीब डेढ़ दर्जन टीटीई संदेह के घेरे में हैं। उधर, इस मामले में प्रयागराज मंडल के सीटीआई रोस्टर (मुख्य टिकट निरीक्षक) एसके पांडेय को निलंबित कर दिया गया। इसके बाद यहां भी डीआरएम संदीप माथुर ने जांच करने के निर्देश दे दिए। उन्होंने एडीआरएम को पूरे मामले की जांच करके रिपोर्ट देने को कहा। यहां तैनात करीब तीन सौ टीटीई की उपस्थिति फिर से जांची जा रही है। ड्यूटी रजिस्टर से उनके मूल हस्ताक्षरों का मिलान कराया जाएगा। मोबाइल लोकेशन के आधार पर उनकी मौजूदगी की भी पुष्टि होगी। बता दें कि कोरोना काल आरंभ होने के बाद इस खेल की शुरूआत हुई। पिछले वर्ष मार्च के बाद ट्रेनों का संचालन बंद हो गया था। ऐसे में रनिंग स्टॉफ को ड्यूटी रोस्टर पर हस्ताक्षर करना था लेकिन, कई टीटीई इसका फायदा उठाते हुए कई महीने के लिए गोल हो गए। इस दौरान वह भत्ता भी लेते रहे। रेल अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही जांच पूरी करके रिपोर्ट सौंप दी जाएगी।
अफसरों के बीच चल रही तनातनी में उजागर हो गया मामला
इस खेल के उजागर होने के पीछे एनसीआर मुख्यालय में तैनात दो वरिष्ठ अफसरों के बीच की तनातनी को मुख्य वजह माना जा रहा है। रेल सूत्रों का कहना है कि दरअसल, कोरोना काल में टीटीई को वर्क फ्रॉम होम की सहुलियत दी गई थी। इसका फायदा उठाकर कई टीटीई कार्यस्थल छोड़कर अपने गृह जनपद चले गए। इसकी एवज मेें उन्होंने सीटीआई को सुविधा शुल्क दिया। जांच के दौरान ही यह मामला लीक हो गया। इसके लीक होने के बाद अब दोनों अफसरों के बीच तनातनी बढ़ गई।