झांसी। बुंदेलखंड में मानसून कमजोर पड़ने की वजह से जून और जुलाई में किसी भी जिले में औसत वर्षा तक नहीं हुई है। इससे एक बार फिर बुंदेलखंड में सूखे का डर सताने लगा है। इससे किसानों की चिंता बढ़ गई है। वहीं, अब पूरी निगाहें अगस्त पर टिकी हुई हैं। यदि अगस्त में भी अच्छी बरसात नहीं हुई तो फसलों को नुकसान होने की संभावना है।
बुंदेलखंड में औसत वर्षा 800 से 900 मिलीमीटर है। जबकि, जून में 70 से 75 और जुलाई में 295 से 300 मिलीमीटर बारिश होती है। मौसम विभाग के अनुसार इस साल झांसी में पिछले दो माह में 201 मिलीमीटर बरसात हो चुकी है। इसमें जून में 76 तो जुलाई में 125.5 मिलीमीटर वर्षा हुई, जो कि सिर्फ 54 प्रतिशत है। सिर्फ बांदा में 300 मिलीमीटर के आसपास बरसात हुई है। बाकी हर जगह हालात झांसी जैसे ही हैं। बुंदेलखंड के किसी भी जिले में औसत बारिश नहीं हुई है। ऐसे में अगस्त में अच्छी बरसात नहीं हुई तो फसलों के लिहाज से हालात बिगड़ जाएंगे। हालांकि, मौसम विभाग का पूर्वानुमान है कि बाकी बचे मानसूनी सीजन में अच्छी बारिश हो सकती है।
10 सालों में झांसी में इतनी हुई बारिश
वर्ष जून जुलाई
2009 6.14 172.1
2010 25.4 252.3
2011 264.2 288.7
2012 1.24 328.2
2013 178.2 328.7
2014 32.04 154.2
2015 25.22 216.2
2016 29.44 269.6
2017 90.70 144.5
2018 40.85 290.6
2019 50.2 298.8
धान को तो दोगुना पानी चाहिए होता
झांसी समेत बुंदेलखंड में अभी उड़द, मूंग, तिल और मूंगफली की फसलें लगाई गई हैं। कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि अभी सिर्फ इतना पानी इन फसलों को मिल रहा है कि यह जिंदा रह सकें। अगर आगे पानी नहीं गिरता है तो दिक्कत होगी। उन्होंने बताया कि धान को तो दोगुना पानी चाहिए होता है। झांसी के चिरगांव, मोंठ, बड़ागांव में किसानों ने धान की रोपाई की है। वहीं, नहरों में भी कम पानी होने से किसानों की समस्या बढ़ गई है।
धान को सप्ताह में एक दिन पानी मिल जाना चाहिए। उड़द, मूंग, तिल और मूंगफली को सप्ताह में पानी मिलते रहना चाहिए। वरना फसल हो नुकसान पहुंच सकता है। - डॉ. एसएस सिंह, कृषि प्रसार निदेशक, केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय।
बुंदेलखंड के किसी भी जिले में अब तक औसत वर्षा नहीं हुई है। सिर्फ बांदा में 300 मिलीमीटर बारिश हुई है। हफ्ते भर तक अभी हल्की बारिश होने का पूर्वानुमान है। - डॉ. मुकेश चंद्र, मौसम वैज्ञानिक।