झांसी। जिला अस्पताल में बेहोशी की हालत में 20 प्रतिशत ऑक्सीजन लेवल के साथ भर्ती हुए मरीज को डॉक्टरों ने बचा लिया। मरीज हर्पीस इंसेफेलाइटिस का शिकार था। मरीज के मर्ज की पहचान कर डॉक्टरों ने तुरंत इलाज शुरू कर दिया। बीमारी से संबंधित इंजेक्शन लगाने के कुछ घंटों बाद ही ऑक्सीजन लेवल सुधरने लगा। अब वह पूरी तरह स्वस्थ है।
हमीरपुर के राठ निवासी 42 वर्षीय युवक को 18 जून की रात को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। वह बेहोश था। डॉक्टरों ने ऑक्सीजन लेवल की जांच की तो 20 प्रतिशत आया। स्टाफ ने कहा कि यहां से रेफर करके किसी बड़े अस्पताल ले जाओ। परिजनों ने कहा कि उसके पास पैसे नहीं हैं। सूचना मिलने पर डॉक्टर ने भी स्टाफ से कहा कि रेफर नहीं करेंगे, मरीज को तुरंत इलाज की जरूरत है। डॉ. डीएस गुप्ता के नेतृत्व में डॉ. रविकांत, डॉ. बृजेश खरे ने हर्पीस इंसेफेलाइटिस से पीड़ित मरीज का इलाज शुरू किया। मरीज को बीमारी से संबंधित एक इंजेक्शन भी लगाया गया। डॉ. डीएस गुप्ता ने बताया कि इंजेक्शन लगने के चार घंटे के अंदर ही मरीज का ऑक्सीजन लेवल 90 प्रतिशत पहुंच गया। अब वह पूरी तरह स्वस्थ है।
ब्रेन डेड होने का बना था खतरा
जिस स्थिति में मरीज अस्पताल पहुंचा था, उन हालातों में ब्रेन डेड या फिर पैरालिसिस होने की संभावना बनी हुई थी। ऐसे में मरीज की जान बचाना बेहद मुश्किल नजर आ रहा था। मगर वो कहावत है ना जाको राखे साइयां मार सके न कोई... मरीज पर सही चरितार्थ हुई।
ये है हर्पीस इंसेफेलाइटिस
हरपीस एक वायरस की बीमारी है, जो कि ज्यादातर त्वचा की नर्व रूट पर होती है। चुनिंदा मामलों में ये दिमाग तक पहुंच जाती है, तो इसे हर्पीस इंसेफेलाइटिस बोलते हैं। इससे दिमाग में सूजन आ जाती है और मरीज बेहोश हो जाता है। इस स्थिति में मरीज के बचने की संभावना कम रहती है।