झांसी। कहर बनकर टूटी कोरोना वायरस की दूसरी लहर झांसी में अब दम तोड़ गई है। 112 दिनों के बाद कोरोना का कोई केस सामने नहीं आया है। हालांकि, एक व्यक्ति की इलाज के दौरान मौत जरूर हो गई है। मगर 31 एक्टिव केस होने से अभी भी खतरा बरकरार है।
झांसी में एक मार्च को कोरोना का एक भी मामला सामने नहीं आया था। इसके बाद से लगातार संक्रमित सामने आ रहे थे। मध्य अप्रैल में तो कोरोना वायरस कहर बनकर टूट पड़ा। चारों तरफ हाहाकार मच गया। सभी स्वास्थ्य संसाधन बौने साबित हो गए। अस्पतालों में मरीजों को भर्ती करने के लिए बेड नहीं बचे। ऑक्सीजन की भी जबरदस्त किल्लत हो गई। रेमडेसिविर इंजेक्शन की मारामारी मच गई। शासन की तरफ से भेजे गए रेमडेसिविर इंजेक्शन पर सियासत गर्मा गई। बबीना विधायक राजीव सिंह पारीछा ने जिला प्रशासन के खिलाफ मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर अपनी मनमर्जी से इंजेक्शन देने का आरोप मड़ दिया। कहा कि जरूरतमंदों को प्रशासन ने इंजेक्शन नहीं दिए। इन सब समस्याओं और विवादों के बाद अब कोरोना की दूसरी लहर दम तोड़ गई है। मंगलवार को 6092 सैंपलों की जांच में झांसी में 112 दिनों के बाद कोरोना का कोई भी केस सामने नहीं आया। ऐसे में जिले में संक्रमितों की संख्या 36492 ही बनी हुई है। वहीं, एक मरीज की मौत हुई, जिससे मरने वालों की संख्या 660 पहुंच गई है। मौजूदा समय में 31 एक्टिव केस बचे हुए हैं। इनमें लक्षण वाले 12 मरीज हैं, जिनमें 12 की हालत गंभीर बनी हुई है। जिले का रिकवरी रेट 98.10 प्रतिशत और मृत्युदर 1.8 फीसदी है।