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दस हजार लोगों के घरों में पहुंच रहा गंदा पानी

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झांसी। रक्सा क्षेत्र में पाइप लाइन से गंदा पानी आने के कारण दस हजार से अधिक आबादी को परेशानी उठानी पड़ रही है। वे पीने के लिए पानी का उपयोग नहीं कर पा रहे हैं।
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महानगर से दस किलोमीटर दूर स्थित गांव रक्सा सूखा क्षेत्र है। रक्सा में करीब दस हजार की आबादी है। यहां का जलस्तर बहुत नीचा होने के कारण क्षेत्रवासियों को साल भर जल संकट का सामना करना पड़ता है। यहां गर्मियों में तो स्थिति दयनीय हो जाती है, इसके अलावा आम दिनों में भी लोगों को पानी खरीदकर पीना पड़ता है। पांच साल पहले जल निगम ने 2.21 करोड़ रुपये की लागत वाली समूह ग्राम रक्सा पेयजल योजना शुरू की थी।
योजना के तहत रक्सा, डेली, ढिमरपुरा, अठौंदना, पाली पहाड़ी, सिजवाहा गांवों में पानी पहुंचाने का काम किया जा रहा है। सिमरधा बांध पर जल शोधन केंद्र बनाया गया है। सिमरधा बांध से नई टंकी तक पानी लाया जाता है। तत्पश्चात टंकी से उक्त क्षेत्रों में जलापूर्ति की जा रही है। मगर, इन दिनों रक्सा के लोग गंदा पानी आने के कारण परेशान हैं। जल शोधन ठीक से न होने के कारण नलों में गंदा पानी आ रहा है, जिससे लोग उसका उपयोग पीने के लिए नहीं कर पा रहे हैं। वहीं कई मुहल्लों में पाइप लाइन होने के बाद भी पानी नहीं पहुंच पा रहा है।
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- जल शोधन के बाद ही जलापूर्ति की जा रही है। अगर गंदा पानी आ रहा है तो इसकी जानकारी नहीं है। बृहस्पतिवार को पानी की जांच कराई जाएगी।
- कुलदीप सिंह, अधिशासी अभियंता जलसंस्थान।
नल से कई दिनों से गंदा पानी आ रहा है। कई बार मुहल्ले के लोगोें ने जलसंस्थान के अधिकारियों से शिकायत की, लेकिन समस्या का हल नहीं निकला।
त्रिवेणी देवी।
उनके मुहल्ले में पिछले कई दिनों से पानी नहीं आ रहा है। जब आता है तो उसमें बदबू आती है। इससे बीमार होने का खतरा बना रहता है।
महेंद्र राय।
घर पर में अकेला रहता हूं। उम्र के हिसाब से अब उतना काम नहीं होता है। मगर इसके बाद भी दूर से पानी भरकर लाना पड़ रहा है।
रामकुमार गुप्ता।
सुबह पानी भरने में दो से तीन घंटे का वक्त लग जाता है। इससे वक्त पर दुकान नहीं खोल पाता। बेहद परेशान हूं।
राजेंद्र राजपूत।
कोरोना वायरस को लेकर चल रहे लॉकडाउन में घर से निकलने में डर लगता है। मगर पानी के लिए मजबूरन उनको हैंडपंप पर जाना पड़ रहा है।
रोशनी श्रीवास।
वैसे में कोट खैरा का रहने वाला हूं मगर बच्चों की पढ़ाई के कारण यहां रहने लगा। मुझे क्या मालूम था कि यहां पीने के पानी के लिए इतना संघर्ष करना पड़ेगा।
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देशराज अहिरवार।
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