झांसी। पुलिस की हीलाहवाली के कारण उरई में रहने वाले एक परिवार को अपने बेटे की मौत का पता चार दिन बाद लग सका। परिजन जानकारी होने के बाद मेडिकल कॉलेज के पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे। यहां पर उन्होंने मृतक की शिनाख्त की। इस मामले में पुलिस की कार्यशैली पर लोगों में परिजन आक्रोशित थे।
उरई क्षेत्र के नया पटेल नगर कोंच बस स्टैंड के पास निवासी बिजली विभाग से सेवानिवृत्त मातादीन कुशवाहा का पुत्र शिवेंद्र सिंह (32) 26 सितंबर को कुकरगांव रिश्तेदारी में जाने की कहकर घर से निकला था। वह अकेला बाइक पर था। रात के वक्त बौद्धपुरा में वह अज्ञात वाहन की टक्कर लगने से गंभीर रूप से घायल हो गया। सूचना पर पहुंची पुलिस ने 108 एंबुलेंस बुलाकर घायल युवक को एक होमगार्ड के साथ झांसी मेडिकल कॉलेज भेज दिया। एंबुलेंस कर्मी व होमगार्ड युवक को अज्ञात में भर्ती कराके वापस लौट गए। इधर, जब वक्त पर शिवेंद्र घर नहीं पहुंचा तो परिजन उसकी तलाश करने लगे। सूचना पुलिस को दी, लेकिन उनका कोई पता नहीं चल सका।
इधर, मेडिकल कॉलेज में 28 सितंबर को उनकी उपचार के दौरान मौत हो गई। इस बात की जानकारी मेडिकल कॉलेज चौकी पुलिस ने उरई पुलिस को दी। मगर इसके बाद भी उरई पुलिस ने मृतक युवक के परिजनों को तलाशने में दिलचस्पी नहीं दिखाई। परिजनों के इंतजार में शव को पोस्टमार्टम हाउस के फ्रीजर में रख दिया गया। एक अक्तूबर को दोबारा परिजन जब थाने पहुंचे तब उनको क्षतिग्रस्त बाइक को दिखाया गया। परिजन बाइक पहचान गए। पुलिस ने बताया कि उक्त बाइक के साथ मिले युवक को घायल अवस्था में मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया था, जिसकी मौत हो गई। शुक्रवार को छोटा भाई शिवम व मामा सुंदर सिंह कुशवाहा अन्य परिजनों के साथ झांसी आ गए। यहां उन्होंने शव की शिनाख्त शिवेंद्र के रूप में की। पोस्टमार्टम हाउस पर मामा ने बताया कि शिवेंद्र की दस साल पहले शादी हुई थी। उसके एक बेटा व एक बेटी है। पुलिस की इस लापरवाही का वे उरई पहुंचने पर विरोध जताएंगे।
ऐसा अगस्त में भी हुआ
विगत 17 अगस्त को सड़क दुर्घटना में घायल उरई के एक युवक को मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया था। उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। उरई पुलिस ने तुरंत युवक की शिनाख्त के प्रयास नहीं किए। तीन दिन बाद शव का अंतिम संस्कार करना पड़ा। अंतिम संस्कार होने के बाद परिजनों को युवक की मौत का पता चल सका।