संवाद न्यूज एजेंसी
झांसी। सेटेलाइट से निगरानी के बावजूद 12 किसानों ने पराली जला दी। यह स्थिति तब है जब कृषि विभाग को पराली जलाते ही सेटेलाइट से मैसेज मिल जाता है। हालांकि, पिछले साल के मुकाबले इस बार पराली जलाने के आधे मामले ही सामने आए हैं।
2024 में पराली जलाने के 24 मामले सामने आए थे। किसानों से जुर्माना वसूला गया था। इस साल अब तक 12 किसानों ने पराली जलाई है। अब प्रशासन ने ग्राम स्तरीय टीम काे निगरानी का आदेश दिया है ताकि और घटनाएं सामने न आएं। डीडी कृषि एमपी सिंह ने बताया कि सेटेलाइट से सभी मैसेज मध्यरात्रि के वक्त मिले हैं। ऐसे में टीम का तत्काल मौके पर पहुंचना संभव नहीं होता। एहतियात के तौर पर टीम को सक्रिय किया है। वहीं, जिन किसानों ने पराली जलाई है, उनसे जुर्माना वसूला जाएगा।
ये है जुर्माने का प्रावधान
0 दो एकड़ से कम पर पांच हजार रुपये का जुर्माना।
0 दो से पांच एकड़ तक 10 हजार रुपये का जुर्माना।
0 पांच एकड़ से अधिक पर 30 हजार रुपये का जुर्माना।
पराली जलाने से नुकसान : गेहूं और धान की फसल काटने के बाद कई किसान उनके अवशेष खेत में ही जला देते हैं। इससे पर्यावरण प्रदूषण तो होता ही है, साथ में किसान अपने खेत को भी नुकसान पहुंचाते हैं। कृषि अधिकारी कुलदीप मिश्रा ने बताया कि अगर किसान अपनी फसल का अवशेष खेत में ही प्रयोग कर लें तो मिट्टी की उर्वरता बढ़ जाएगी।
गोशालाओं तक पहुंचाई जा रही पराली : गठित टीम की निगरानी में पराली गोशालाओं तक पहुंचाई जा रही है। अब तक 30 एमटी से ज्यादा पराली गोशालाओं में पहुंचाई जा चुकी है। एक कंपनी पराली की खरीद भी कर रही है। इस कंपनी ने करीब 25 एमटी पराली खरीदी है।