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‘थैंक्यू सो मच मां.. एंड आई एम सॉरी’ लिखकर दे दी बेटी ने जान

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झांसी। साइबर क्राइम की शिकार हुई बेटी ने आत्महत्या करने वाले अपने परिवार के लोगों ने नाम एक सुसाइड नोट छोड़ा है, जिसमें उसने अपने परिवार के प्रति प्यार जताया, बेहतर परवरिश के लिए मां को धन्यवाद कहा और आत्मघाती कदम उठाने के लिए माफी भी मांगी, जिसे पढ़कर सभी की आंखें नम हो उठीं।
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यशस्वी ने बचपन से ही अपने पिता जगमोहन पाराशर को कड़ी मेहनत करते देखा था। वे जहां एक ओर खेती देखते थे, तो वहीं एक मेडिकल एजेंसी पर भी काम करते थे। ऐसे में यशस्वी भी एक बेटे की तरह पिता और परिवार का सहारा बनना चाहती थी। यही वजह रही कि उसने बारहवीं पास करने के बाद नौकरी करने का फैसला कर लिया था। उसकी इसी चाहत का साइबर अपराधियों ने फायदा उठाया और पिता की गाढ़ी मेहनत की कमाई हड़प ली। इस घटना ने उसके मन पर गहरा आघात पहुंचाया था, जिसके चलते उसने आत्मघाती कदम उठा लिया। आत्महत्या करने से पहले यशस्वी ने एक सुसाइड नोट भी लिखा, जिसमें उसने मां, पिता और भाई तीनों का जिक्र किया। अच्छी परवरिश के लिए मां को धन्यवाद दिया। जबकि, भाई को माता-पिता का ख्याल रखने व बड़ा होकर अधिकारी बनने की सलाह दी। साथ ही परिवार के प्रति प्रेम जताया तथा आत्महत्या करने के लिए माफी भी मांगी। यशस्वी के शव के पास से मिले सुसाइड नोट में लिखा है कि ‘पापा ये किसी को न दिखाना, पापा हम आपकी परेशानियों और घर की कलह की जड़ हैं, जो अब नहीं रहेगी। अब आप सिगरेट छोड़ देना। भैया, मां-पापा को ख्याल रखना, वो अच्छे हैं। हम उनका सपना पूरा नहीं कर पाए, तुम ऑफिसर बन जाना। पापा के पैसे बर्बाद मत करना। थैंक्यू सो मच मां, आई एम सॉरी, रियली सॉरी, आई लव यू सो मच माई फैमिली। मैं अपनी मर्जी से जान दे रही हूं।’ सुसाइड नोट को पुलिस ने कब्जे में ले लिया है। लेकिन, इससे पहले जिसने भी उसे पढ़ा, सभी की आंखें नम हो उठीं।
अधूरा रह गया ‘उड़ान’ का सपना
झांसी। जॉब के नाम पर साइबर ठगी का शिकार होने के बाद यशस्वी को परिवार के लोगों ने समझाया था कि वो अभी नौकरी के चक्कर में न पड़े, बल्कि आगे तैयारी करे और अच्छी नौकरी हासिल करे। इसके बाद उसने एयरफोर्स में जाने का मन बना लिया था। चूंकि, पढ़ाई में वो शुरू से ही मेधावी थी। ऐसे में ये मुकाम उसके लिए कठिन भी नहीं था। पिता ने एक नामचीन कोचिंग में उसका दाखिला भी करा दिया था, जिसकी फीस साठ हजार रुपये जमा की थी। रोजाना ऑनलाइन पढ़ाई भी जारी थी, लेकिन अचानक यशस्वी ने आत्मघाती कदम उठा लिया।
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अकेला रह गया छोटा भाई
झांसी। परिवार में माता-पिता के अलावा यशस्वी और उसका छोटा भाई विमोक्ष (9) था, जिसे वो बचपन से ही बहुत प्यार करती थी। बहन की मौत के बाद भाई का भी रो-रोकर बुरा हाल है। बार-बार वो सभी से यही पूछता नजर आया कि दीदी को क्या हो गया है, वो कब आएगी। सभी अपने अपने तरीके से नन्हें बच्चे को दिलासा देने में जुटे रहे। वहीं, घर पर दिन भर पड़ोसियों व रिश्तेदारों को जमावड़ा लगा रहा। सब यशस्वी के माता-पिता को समझाते रहे। बेटी की मौत की खबर पाने के बाद से मां-पिता का रो-रोकर बुरा हाल रहा।
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