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Jhansi News: शादी के छह साल बाद जन्मी बेटी, इलाज न मिला और नवजात ने पिता की गोद में ही तोड़ दिया दम

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अमर उजाला ब्यूरो



झांसी। मेडिकल कॉलेज में शुक्रवार सुबह जन्मी बेटी को मेडिकल कॉलेज और महिला जिला अस्पताल में उपचार नहीं मिल सका। गोद में बेटी को लेकर पिता एंबुलेंस से मेडिकल कॉलेज-महिला जिला अस्पताल के बीच चार घंटे तक दौड़ता रहा। समय से उपचार नहीं मिलने पर नवजात ने पिता की गोद में दम तोड़ दिया। मामले में मेडिकल कॉलेज प्रधानाचार्य डॉ. मयंक सिंह ने बाल रोग विभागाध्यक्ष डॉ. ओमशंकर सिंह के नेतृत्व में जांच के लिए कमेटी गठित कर 24 घंटे में रिपोर्ट मांगी है।

ललितपुर के मड़ावरा थानांतर्गत गांव तलऊ निवासी सोनू परिहार की पत्नी राजाबेटी को बृहस्पतिवार की शाम प्रसव पीड़ा हुई। परिजन उसे नजदीकी अस्पताल ले गए। गर्भवती की हालत देख डॉक्टरों ने तत्काल ललितपुर के जिला अस्पताल के लिए रेफर कर दिया। यहां गर्भवती की हालत बिगड़ने के साथ ही उसका ब्लड प्रेशर बढ़ने पर डॉक्टरों ने उसे मेडिकल कॉलेज, झांसी भेज दिया। मेडिकल कॉलेज में गर्भवती महिला को स्त्री रोग विभाग में भर्ती किया गया। शुक्रवार सुबह राजाबेटी ने बेटी को जन्म दिया। जन्म लेने के बाद बेटी के नहीं रोने और सांस लेने में दिक्कत पर उसे तत्काल एनआईसीयू (न्यू बोर्न केयर यूनिट) में भर्ती करने के लिए भेज दिया।
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बेटी को गोद में लेकर पिता वार्ड नंबर पांच में बनी एनआईसीयू पहुंचा। जहां डे ड्यूटी इंचार्ज डॉ. सुशील कुमार ने जीवनरक्षक उपचार देकर बेड खाली नहीं होने की बात कहकर जिला अस्पताल रेफर कर दिया। पिता तुरंत निजी एंबुलेंस से बेटी को लेकर महिला जिला अस्पताल पहुंचा। यहां भी बेड खाली नहीं होने पर दोबारा मेडिकल कॉलेज जाने को कहा गया। पिता फिर एंबुलेंस से मेडिकल कॉलेज के बच्चा वार्ड पहुंचा मगर डॉक्टरों ने असमर्थता जताते फोन नंबर लिख लिया ताकि बेड खाली होने पर बेटी को भर्ती किया जा सके। इसके बाद पिता बेटी को गोद में लेकर परेशान होता रहा और कुछ समय बाद बेटी ने दम तोड़ दिया।



- ये कहना है एनआईसीयू डे केयर इंचार्ज का



डॉ. सुशील कुमार ने बताया कि जन्म लेने के बाद बेटी रोयी नहीं थी। सांस लेने में भी दिक्कत थी। हालत गंभीर होने पर महिला जिला अस्पताल भेज दिया क्योंकि कोई बेड खाली नहीं था। जिला अस्पताल में भर्ती नहीं करने पर वह दोबारा लौटकर आया तो उसका फोन नंबर लिख लिया ताकि बेड खाली होते ही फोन किया जा सके। दोपहर करीब 12 बजे उसे फोन किया तो उसने आने के लिए कहा मगर नहीं आया। इसके बाद फिर फोन मिलाया मगर उसका फोन नहीं उठा।



0- शादी के छह साल बाद मन्नत से हुई बेटी



सोनू ने बताया कि उसकी शादी करीब छह साल पहले राजाबेटी से हुई थी। बड़ी मन्नतों के बाद बेटी हुई थी। इससे पूरा परिवार शोक में डूब गया है।

0- वर्जन

नवजात को सांस लेने में दिक्कत थी। वह रोयी भी नहीं थी। उसके शरीर में शारीरिक अपंगता भी थी। बेड खाली नहीं होने पर उसे महिला जिला अस्पताल भेज दिया मगर वहां भर्ती नहीं किया गया। उसका पिता दोबारा लौटकर आया मगर उसने किसी को नहीं बताया और कुछ देर बाद बच्ची की मौत हो गई। - डॉ. सचिन माहुर, सीएमएस मेडिकल कॉलेज
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महिला जिला अस्पताल में एसएनसीयू (सिक न्यू बोर्न केयर यूनिट) है। एक भी वेंटिलेटर नहीं है, ऐसे में वेंटिलेटर के लिए मेडिकल कॉलेज से नवजात को नहीं भेजना चाहिए। अस्पताल में पूरे जिले से आने वाले नवजात शिशुओं को भर्ती किया जाता है। - डाॅ. राजनारायण, महिला जिला अस्पताल
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