- मेडिकल कॉलेज में स्त्री एवं प्रसूति विभागाध्यक्ष ने कहा - अनियमित दिनचर्या से गर्भवती महिलाओं में हो रही बीपी, शुगर आदि की समस्या
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। गर्भवती महिलाओं का देर रात तक मोबाइल और टीवी देखना उनकी कोख में पल रहे शिशु की जान को खतरे में डाल रहा है। व्यायाम या जरूरी कामकाज न करना समस्या को और बढ़ा रहा है। डॉक्टरों के पास इस तरह के मामले रोजाना आ रहे हैं।
मेडिकल कॉलेज में स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग की डॉक्टर हेमा जे. शोभने ने बताया कि यहां आने वाली गर्भवती महिलाओं में अधिकांश में ब्लड प्रेशर, शुगर, थायराइड, खून की कमी, घबराहट, बेचैनी, तनाव, नींद नहीं आने आदि की शिकायत होती है। जब दिनचर्या के बारे में पूछा जाता है, तो अधिकांश की एक जैसी मिलती है। जैसे देर रात तक मोबाइल व टीवी देखना, सुबह समय से न उठना, व्यायाम न करना तथा घरेलू कामकाज से दूर रहना।
उन्होंने बताया कि बच्चा जब गर्भ में होता है, तो मां के शरीर में होने वाली हर समस्या का प्रभाव उस पर पड़ता है। गर्भवती को नियमित व्यायाम व जरूरी घरेलू कामकाज करना चाहिए, इससे पेल्विस बोन (कमर की हड्डी) लचीली होती है। जब हड्डी खिसकती है, तो सामान्य प्रसव होता है। व्यायाम न करने पर कमर की हड्डी लचीली नहीं हो पाती और प्रसव में दिक्कत आती है। देर रात तक मोबाइल व टीवी देखने से नींद पूरी नहींं होती, इसका सीधा असर गर्भस्थ शिशु पर पड़ता है। देर रात तक जागने से इनसोमानिया (नींद नहीं आने) की शिकायत होती है, इससे ब्लड प्रेशर, शुगर, थायराइड आदि समस्या उत्पन्न होती है। गर्भस्थ शिशु का विकास भी प्रभावित होता है। उसकी जान खतरे में पड़ सकती है। आमतौर पर ऐसी महिलाओं के बच्चे जन्म के समय बेहद कमजोर होते हैं। बच्चों के दिमाग पर भी बुरा असर पड़ता है।
0-वर्जन
देर रात तक मोबाइल या टीवी देखने व व्यायाम न करने से गर्भवती महिला को ब्लड प्रेशर, शुगर, थायराइड, घबराहट आदि की शिकायत होती है। इससे कोख में पल रहे शिशु की जान भी खतरे में पड़ जाती है। नियमित व्यायाम से प्रसव सामान्य होने के काफी आसार होते हैं।
डॉ. हेमा जे. शोभने, विभागाध्यक्ष स्त्री एवं प्रसूति विभागाध्यक्ष, मेडिकल कॉलेज