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आंधी-तूफान ने रोका ‘करंट

Tue, 31 May 2016 02:17 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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current, jhansi news - फोटो : demo pic
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झांसी। प्रदेशभर में आंधी-तूफान का सीधा असर बिजली की सप्लाई पर पड़ रहा है। जगह-जगह ग्रिड लाइन के टावर टूटने से ‘करंट’ को आगे बढ़ाने का रास्ता बंद हो गया है, जिससे पारीछा थर्मल पावर प्लांट की छह में से पांच इकाइयों को बंद कर दिया गया है। 210 मेगावाट की चालू इकाई से भी पूर्ण क्षमता के साथ उत्पादन नहीं किया जा रहा है।
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इस बार आंधी-तूफान से बिजली ढांचे को खूब नुकसान पहुंच रहा है। पिछले कई दिनों से प्रदेश के अलग-अलग स्थानों पर आए आंधी-तुफान से ग्रिड लाइन के टावर टूट गए हैं। इनमें प्रमुख रूप से लखनऊ, सरोजनी नगर से मलेसेमऊ, रायबरेली व मोहनलाल गंज के जैतीपुर में ट्रांसमिशन लाइनें व कई जगह टावर टूटे पड़े हैं। ट्रांसमिशन व टावरों के टूटने से संबंधित क्षेत्रों में ग्रिड लाइन से करंट आगे बढ़ना बंद हो गया है। सभी जगह युद्धस्तर पर मरम्मत कार्य जारी है, मगर दस जून से पहले काम पूरा होने की उम्मीद कम है। यही कारण है कि आमतौर पर गर्मियों में जहां प्रदेशभर में चौदह हजार मेगावाट बिजली की आवश्यकता पड़ती थी। लेकिन अब बिजली की मांग घटकर छह हजार मेगावाट रह गई है। बिजली की डिमांड घटने से उत्तर प्रदेश पावर  कारपोरेशन ने कई थर्मल पावर प्लांटों पर उत्पादन बंद करा दिया है, इनमें पारीछा थर्मल पावर प्लांट भी शामिल है। प्लांट में 110 मेगावाट की दो, 210 मेगावाट की दो व 250 मेगावाट की दो इकाइयां स्थापित हैं, इनमें 210 मेगावाट की नंबर चार इकाई को छोड़कर बाकी पांच इकाइयों की मशीनों को बंद (थर्मल ब्रेकिंग) कर दिया गया है। चालू 210 मेगावाट की इकाई से भी मात्र 155 मेगावाट बिजली बनाई जा रही है।

‘प्रदेश में बिजली की मांग घटने से मुख्यालय के आदेश पर मशीनों से उत्पादन बंद किया गया है। मुख्यालय का आदेश मिलने पर अब इकाइयों को चालू किया जाएगा।’
-अखिलेश सिंह, मुख्य महाप्रबंधक, पारीछा थर्मल पावर प्लांट।  


बजाज पावर प्लांट का भी उत्पादन बंद
ललितपुर स्थित बजाज पावर प्लांट में स्थित 660 मेगावाट की तीन इकाइयों में एक इकाई से उत्पादन किया जा रहा था, मगर 25 मई को तालबेहट के निकट 220 केवी का टावर गिरने के बाद से संबंधित इकाई का उत्पादन भी बंद चल रहा है।
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टावरों के गिरने से अफसर भी हैरत में
आंधी-तूफान के कारण टावर गिरने से बिजली अफसर भी हैरत में हैं। अधीक्षण अभियंता का कहना है कि वर्ष 1997 में आए तूफान में टावर गिरने की घटनाएं हुई थीं, मगर इस बार कुछ ज्यादा ही क्षति हो रही है। टावर को बेहद मजबूती के साथ लगाया जाता है। अगर आंधी-तूफान ऐसा ही कहर ढाएगा तो बिजली का संचालन मुश्किलों में पड़ सकता है।
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