आईजी कानपुर जोन के ‘एक नंबर भरोसे का’ ने झांसी, ललितपुर व जालौन पुलिस को क ठघरे में खड़ा कर दिया है। ‘एक नंबर भरोसा’ पर 22 दिन में 2361 शिकायतें आई हैं। पुलिस ने मजबूरन प्रभावी कार्रवाई कर पीड़ित को राहत भी पहुंचाई है।
आईजी आशुतोष पांडेय को लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि थानों पर पुलिस पीड़ितों की सुनवाई नहीं कर रही है। फरियादियों के साथ थानों पर अभद्र व्यवहार किया जा रहा है। इसको गंभीरता से लेते हुए आईजी ने झांसी, ललितपुर व जालौन के थानों में सीसीटीवी कैमरे लगवाए, जिसके माध्यम से वह कानपुर से ही थानों की गतिविधियों पर नजर रखे हैं। इसके बाद उन्होंने ‘एक नंबर भरोसे का’ शुरू किया, जिससे प्राप्त शिकायतों पर आईजी की सीधे नजर रहती है। गठित टीम शिकायत मिलते ही सीधे संबंधित थानाध्यक्ष को कार्रवाई के लिए आदेशित करती है। इसके बाद परिणाम सामने आने तक आईजी की टीम प्रत्येक घंटे थानाध्यक्ष से पूछताछ करती है। आईजी को 13 मई से चार जून तक यानी 22 दिन के अंदर 2361 पीड़ितों ने शिकायत की है, जिसमें झांसी से 1324, ललितपुर से 766 और जालौन से 271 हैं। इस आंकड़े से जिला पुलिस की कार्य शैली कटघरे में खड़ी हो गई है।
राहत की बात यह है कि ‘एक नंबर भरोसे का’ पर जाने वाली शिकायतों पर थानों की पुलिस त्वरित प्रभावी कार्रवाई करने को दौड़ती है। चूंकि मामला उच्चाधिकारियों के संज्ञान में आ जाता है, इसलिए समझा बुझाकर दोनों पक्षों के बीच पैदा हुए गिले शिकवे दूर करके राजीनामा करवा दिया जाता है।
मुकदमों का ग्राफ तेजी से बढ़ने से अटकी सांसें
आईजी के आदेश पर थानों पर दर्ज होने वाले मुकदमों से तेजी से अपराध का ग्राफ बढ़ रहा है। जिसको लेकर थानेदारों की पेशानी पर चिंता की लकीरें पड़ने लगी हैं। आगामी छह अथवा सात जून को होने वाली झांसी पुलिस की क्राइम मीटिंग को लेकर कई थानेदारों की सांसें अटकी हुई हैं। पुलिस विभाग के सूत्रों पर यकीन करें तो कुछ थानेदारों की लगाम कसी जा सकती है।