मेडिकल कालेज के छात्रावास में एमडी की छात्रा डा. प्रीति मिश्रा की 30 अक्तूबर को संदिग्धावस्था में हुई मौत के मामले की फाइल डीआईजी ने तलब कर ली है। जांच की धीमी गति पर नाराजगी जताते हुए डीआईजी ने सीओ सिटी से अब तक हुई जांच पड़ताल के बारे में भी पूछताछ की है।
गोरखपुर के सहजनवां थानांतर्गत खानीपुरा निवासी रेलवे कर्मचारी देवेंद्र मिश्रा की बेटी डा. प्रीति मिश्रा (26) रानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कालेज से एमडी कर रहीं थीं। वह मेडिकल कालेज के पीजी छात्रावास के रूम नंबर 69 में रहती थीं। 29 सितंबर की रात करीब 10.52 बजे उनकी अपने भाई अंकुर मिश्रा और मां उर्मिला मिश्रा से फोन पर बात हुई थी। कुछ देर बाद तबीयत खराब होने पर वह साथी छात्रा के साथ मेडिकल कालेज की इमरजेंसी पहुंची, जहां उपचार कराया। यहां से लौटकर वह अपने कमरे पर आ गईं।
30 सितंबर को साथी डाक्टरों ने डा. प्रीति को फोन किया मगर फोन नहीं उठा। कमरे पर जाकर देखा तो पलंग पर शव पड़ा हुआ था। मुंह से झाग निकल रहा था और हाथ में ग्लूकोस की बोतल चढ़ रही थी। पोस्टमार्टम में मौत का कारण स्पष्ट नहीं होने पर पुलिस ने फोरेंसिक जांच के लिए बिसरा भेज दिया। बाद में भाई अंकुर मिश्रा की तहरीर पर पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज किया था। लेकिन, अब तक पुलिस किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंच पाई है।
मामले की पड़ताल की धीमी गति पर डीआईजी शरद सचान ने सख्त नाराजगी जाहिर की है। रविवार को डीआईजी ने सीओ सिटी संजय कुमार शर्मा को तलब करके अब तक की गई कार्रवाई की रिपोर्ट ली। साथ ही इस मामले की फाइल भी तलब की है। अब डीआईजी अपने स्तर पर घटना की जांच कराएंगे।