झांसी। जिला अस्पताल में कोरोना के वार्ड बनाने में लापरवाही बरती गई है। अस्पताल में चारों तरफ कोरोना के वार्ड बनाए दिए गए हैं। ऐसे में यहां इलाज कराने के लिए आ रहे सामान्य मरीजों को भी संक्रमण का खतरा है। जानकारों का कहना है कि कोरोना वार्ड को एक तरफ बनाना चाहिए था।
जिला अस्पताल में नेत्र ऑपरेशन थिएटर के बगल में आइसोलेशन वार्ड है। लेवल- 2 के इस वार्ड में कोरोना के मरीजों को भर्ती किया जाता है। जबकि, हार्ट सेंटर में नीचे कोरोना की वैक्सीन लगती है तो ऊपर की तरफ कोविड मरीजों को भर्ती किया जा रहा है। इसके बाद पीछे की तरफ मेल और फीमेल मेडिकल वार्ड में भी कोरोना के मरीज भर्ती किए जा रहे हैं। यहीं पर नीचे और बगल में सामान्य मरीज भर्ती होते हैं। कोरोना और सामान्य मरीजों को ले जाने का रास्ता भी एक ही है। ऐसे में सामान्य मरीज और उससे मिलने आने वाले परिजनों को भी संक्रमित होनेे का खतरा बना हुआ है।
अस्पताल प्रशासन मेल - फीमेल मेडिकल वार्ड और मेल - फीमेल सर्जिकल वार्ड को ही कोरोना मरीजों के लिए अलग कर देता तो यह एक तरह की कोविड बिल्डिंग बन जाती। फिर सामान्य मरीजों को आइसोलेशन वार्ड या हार्ट सेंटर के ऊपर भर्ती किया जा सकता था। ऐसे में उन्हें संक्रमण का खतरा नहीं रहता।
सर्जिकल कैप, ग्लब्स की कमी
अस्पताल के स्टाफ ने बताया कि उन्हें पर्याप्त मात्रा में सर्जिकल कैप और ग्लव्स नहीं मिल रहे हैं। ऐसे में वह कोरोना के खिलाफ पूरी सुरक्षा से लड़ाई नहीं लड़ पा रहे हैं। इसके अलावा एन-95 मास्क भी नहीं मिल रहे हैं।
प्रमुख अधीक्षक कोरोना संक्रमित हैं। मैं तो प्रभारी हूं। कोरोना वार्ड के संबंध में पहले से ही यह तय हो गया था। किसी भी प्रकार के बदलाव के संबंध में आला अधिकारी ही फैसला कर सकते हैं। वैसे अस्पताल में जगह की भी काफी कमी है। - डॉ. सुमन, प्रभारी सीएमएस।