झांसी। पल्मोनरी टीबी या फेफड़े की टीबी और कोविड के लक्षणों में समानता के चलते सभी टीबी मरीजों की कोविड की जांच व कोविड के मरीजों की टीबी की जांच की जा रही है।
मेडिकल कॉलेज के टीबी एवं चेस्ट रोग विभागाध्यक्ष डॉ. मधुर्मय शास्त्री ने बताया कि टीबी कई प्रकार की होती है, लेकिन सबसे ज्यादा पल्मोनरी टीबी होती है। इसका संबंध फेफड़ों में समस्या से होता है। इसी प्रकार कोविड का प्राइमरी अंग फेफड़ा होता है। दोनों ही बीमारियों का प्रसार श्वसन के रास्ते होता है। इसीलिए खांसने, छींकने से दोनों बीमारियां तेजी से फैलती हैं। पल्मोनरी टीबी और कोविड में समानता के कारण ही मरीजों की दोनों तरह की जांच के निर्देश सरकार द्वारा दिए गए हैं। दोनों के लक्षण समान होते हैं, जैसे खांसी, बुखार, सांस का फूलना आदि। दोनों ही बीमारियों का संबंध मनुष्य की रोग प्रतिरोधक क्षमता से होता है। यदि मनुष्य के शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता अच्छी है तो उसमें कोविड और टीबी संक्रमण की संभावना कम होती है।
एक साथ दोनों का चल सकता है इलाज
यदि कोई टीबी के साथ कोविड से संक्रमित है या कोई कोविड उपचाराधीन मरीज टीबी से ग्रसित है तो दोनों का इलाज एक साथ चल सकता है।
ये है आंकड़ा
वर्तमान में जनपद में 3,242 फेफड़ों की टीबी के मरीज इलाज करा रहे हैं। वहीं, 18 जनवरी तक जनपद में कोविड के एक्टिव मरीजों की संख्या 94 है।