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अधिशासी अभियंता दो महीने से नहीं दे रहे जवाब, भ्रष्टाचार का आरोप झेल रहा विभाग

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pipeline.jpg - फोटो : pipeline.jpg
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झांसी। महानगर की जनता पाइपलाइन लीकेज का दर्द झेल रही है और अफसर आंखें बंद किए हुए हैं। इसे लेकर शासन स्तर तक मामला पहुंचा, तो जल संस्थान झांसी डिवीजन की महाप्रबंधक ने अधिशासी अभियंता से जवाब तलब किया है। साथ ही नगर निगम से लीकेज सही कराने के लिए मिले आठ करोड़ रुपये का भी हिसाब किताब मांगा है। अधिशासी अभियंता की चुप्पी के चलते विभाग पर लग रहे भ्रष्टाचार के आरोपों पर भी उन्होंने सख्त नाराजगी जताई है।
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नगर निगम के उपसभापति राजेश त्रिपाठी ने करीब दो महीने मंडलायुक्त और हाल ही में मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर जल संस्थान के अधिशासी अभियंता की शिकायत की थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि जल संस्थान को महानगर की पेयजल आपूर्ति व्यवस्था और लीकेज सुधार के लिए नगर निगम ने आठ करोड़ रुपये दिए थे, लेकिन अधिशासी अभियंता ने धन का दुरुपयोग कर लिया। शिकायत में कहा गया था कि जल संस्थान भी कार्यदायी संस्था है, लेकिन अधिशासी अभियंता ने लीकेज सही कराने का काम अपने चहेते ठेकेदार को लाभ देने के लिए सीएंडडीएस को दे दिया। मामले में शासन स्तर से संज्ञान लिया गया, तो महाप्रबंधक ने अधिशासी अभियंता को पत्र लिखकर जानकारी मांगी है। महाप्रबंधक ने पत्र में कहा है कि आरोपों के संबंध में बीते दो-तीन महीने से अधिशासी अभियंता से पत्रावली और जवाब मांगा जा रहा है, लेकिन वह कोई जवाब नहीं दे रहे हैं। इसके चलते लगातार शिकायतें होने से विभाग की छवि धूमिल हो रही है। महाप्रबंधक ने जानकारी दिए बिना लीकेज कार्य का भुगतान और सीएंडडीएस को काम देने पर रोक लगा दी है। मामले को लेकर जल संस्थान में हड़कंप मचा हुआ है।
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तमाम जगह पर टूटी हैं पाइपलाइनें
महानगर में तमाम जगहों पर पाइपलाइनें टूटी हुई हैं। जगह-जगह लीकेज के चलते जलभराव होता है। इसे लेकर आए दिन पार्षद शिकायतें करते हैं। नगर निगम भी जल संस्थान और जल निगम को पत्र लिख चुका है, लेकिन लीकेज सही न होने से लोगों की दिक्कतें बढ़ रही हैं। पाइप लाइनें टूटी होने के कारण कीमती पानी बरबाद हो रहा है। अभी सर्दियां हैं, इस कारण पानी की कीमत समझ में नहीं आ रही है। लेकिन, जब गर्मी आती है तब पानी के लिए शहर में हाहाकार मचता है। लोग बूंद- बूंद पानी के लिए तरसते हैं। जल संस्थान इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है। विभाग के पास शिकायतें आती हैं, लेकिन उन पर ध्यान नहीं दिया जाता है।
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