झांसी। कोरोना वायरस के साथ-साथ बर्ड फ्लू भी चुनौती बना हुआ है। कोरोना की वैक्सीन लगने से लोगों में उम्मीद की किरण जगी है। इसी बीच, बर्ड फ्लू के उपचार के लिए भी ओसेल्ट्रामिविर दवा मंगवा ली गई है। इन दवाओं को सरकारी और निजी अस्पतालों में पहुंचा दिया गया है। हालांकि, राहत की बात ये है कि झांसी में बर्ड फ्लू का अब तक कोई मामला सामने नहीं आया है।
कोरोना महामारी के बीच बर्ड फ्लू तेजी से फैल रहा है। कई राज्य इसकी चपेट में आ गए हैं। इस वायरस की वजह से देश भर में दहशत का माहौल बन रहा है। हालांकि, घबराने की जरूरत नहीं है। बर्ड फ्लू यानी एवियन इंफ्लूएंजा का इलाज है। समय रहते अगर इसका इलाज हो जाता है तो इस बीमारी से किसी तरह का खतरा नहीं है। किसी मरीज को बर्ड फ्लू है या नहीं, इसकी जांच डॉक्टर पॉलीमिरेज चेन रिएक्शन के जरिए करते हैं। जांच से पता चलता है कि शरीर में बर्ड फ्लू के वायरस का न्यूक्लिक एसिड है या नहीं।
इसके आधार पर डॉक्टर ये पता करते हैं कि इंसान के शरीर में किस तरह का बर्ड फ्लू वायरस है। अगर ऐसे पता नहीं चलता तो डॉक्टर खून की जांच करके एंटीबॉडी का पता लगाते हैं। झांसी में अब तक बर्ड फ्लू का कोई भी मामला सामने नहीं आया है। इसके बावजूद सरकारी महकमे ने अपनी तैयारी पूरी कर ली है। बर्ड फ्लू के इलाज के लिए ओसेल्ट्रामिविर दवा को पर्याप्त मात्रा में मंगवा लिया गया है। सरकारी और निजी अस्पतालों में इस दवा की उपलब्धता सुनिश्चित कर ली गई है।
ये रखें सावधानी
संक्रमित पक्षियों, इलाकों से खुद को दूर रखकर बर्ड फ्लू से बचा जा सकता है। बर्ड फ्लू का वायरस पक्षियों के थूक, स्वैब और मल में होता है। ऐसे में संक्रमित इलाके से दूर रहने में ही भलाई है, क्योंकि इसका वायरस इंसानी शरीर में आंखों, नाक या मुंह के जरिए जा सकता है। हवा के साथ ये वायरस तैरते रहते हैं।
ये हैं लक्षण
- जुकाम, बुखार
- बेचैनी, खांसी
- गले में जलन
- मांसपेशियों में दर्द
- उल्टियां, डायरिया
- सिरदर्द, जोड़ दर्द
- थकान, नींद न आना
- आंखों में कंजक्टिवाइटिस
बर्ड फ्लू के इलाज के लिए ओसेल्ट्रामिविर दवा जिले में पर्याप्त मात्रा में आ गई है। जिला अस्पताल, मेडिकल कॉलेज समेत निजी अस्पतालों में इस दवा की उपलब्धता सुनिश्चित कर ली गई है।
- अतुल उपाध्याय, सहायक आयुक्त, औषधि।