फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

मां को कोविड के बारे में नहीं बताया, घर पर चला इलाज और ठीक हो गईं

विज्ञापन
corona.jpg - फोटो : corona.jpg
विज्ञापन
झांसी। कोरोना के डर ने कई लोगों की जान ले ली। इस वजह से सीपरी बाजार निवासी बुजुर्ग महिला में कोरोना के पूरे लक्षण होने के बावजूद परिजनों ने न तो जांच कराई और न ही उन्हें संक्रमण की जानकारी दी। परिजनों को डर था कि यदि उन्हें बता देंगे कि कोरोना के लक्षण हैं तो वह डर जाएंगी और तबीयत बिगड़ जाएगी। उन्हें बागवानी, पेंटिंग में व्यस्त रखा। धीरे-धीरे वह ठीक हो गईं।
विज्ञापन

सीपरी बाजार निवासी डॉ. एसके त्रिपाठी (65) बुंदेलखंड राजकीय आयुर्वेदिक कॉलेज से प्राचार्य पद से सेवानिवृत्त हो चुके हैं। उनकी पत्नी ऊषा त्रिपाठी (60) अप्रैल में संक्रमण की चपेट में आ गईं। बुखार, खांसी, जुकाम होने के साथ-साथ उनके मुंह का स्वाद भी चला गया। तबीयत इतनी बिगड़ गई कि अस्पताल में भर्ती करने की नौबत आ गई। उस समय अस्पतालों में बेड भरे चल रहे थे। ऑक्सीजन की भी किल्लत चल रही थी। रेमडेसिविर इंजेक्शन की उपलब्धता भी कम थी। इन सब विपरीत परिस्थितियों में परिजनों ने उन्हें अस्पताल में भर्ती नहीं कराया। घर पर ही इलाज चलता रहा। बेटे डॉ. प्रशांत त्रिपाठी ने बताया कि मां घबरा न जाएं, इसलिए उनका कोरोना का टेस्ट भी नहीं कराया। मगर लक्षण पूरे कोरोना वाले ही थे। पिता खुद बीएएमएस चिकित्सक थे, इसलिए घर पर ही इलाज करते रहे। मां को बागवानी का शौक है, इसलिए उन्हें इस पर ध्यान देने को कहा। वह कई घंटों तक बागवानी कर खुद को व्यस्त रखे रहीं। उन्होंने दीवार पर बुंदेलखंड के गांवों की पेंटिंग भी बनाई। धीरे-धीरे वो स्वस्थ होने लगीं। अब वह पूरी तरह ठीक हैं। उनके बोए गए पेड़ों से आम के फल भी आने लगे हैं। प्रशांत का कहना है कि कोरोना में ज्यादातर मौत डर जाने के कारण हो रही हैं। इसलिए उन्होंने मां को कोविड के बारे में नहीं बताया।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें