झांसी। कोरोना वायरस को लेकर जांच सैंपल लेने में तो काफी तेजी बरती जा रही है लेकिन रिपोर्ट आने में एक सप्ताह तक का समय लग रहा है। इतने लंबे अंतराल बाद रिपोर्ट आने से लोगों में नाराजगी है। उनका कहना है कि जिनकी सैंपलिंग हो रही है, उन्हें अलग रहने के लिए जागरूक भी नहीं किया जा रहा है। छह से सात दिनों में पॉजिटिव मरीज कइयों को संक्रमित कर सकता है। ऐसे में जल्द से जल्द रिपोर्ट आनी चाहिए।
सिंधी चौराहे के पास एक कोरोना पॉजिटिव मरीज मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम ने आठ जुलाई को आसपास रहने वाले लोगों की सैंपलिंग की थी। यहां रहने वाली एक महिला की रिपोर्ट मंगलवार शाम को आई, तो वह पॉजिटिव निकली। जबकि, अन्य परिजनों की रिपोर्ट अभी तक नहीं आई है। महिला के चचेरे भाई विनोद सब्बरवाल का कहना है कि सैंपल लेने के इतने दिनों बाद रिपोर्ट आने का क्या फायदा है? उनकी बहन में किसी भी प्रकार का लक्षण नहीं हैं। ऐसे में आठ दिनोें में वह परिजनों व अन्य लोगों के संपर्क में आ गईं। इसके अलावा जांच सैंपल लेने के बाद उन्हें अलग या फिर क्वारंटीन रहने के लिए भी नहीं कहा गया। वहीं, सरकार के नए नियमों के तहत बिना लक्षण वाले मरीजों को तो दस दिन में डिस्चार्ज कर दिया जाता है। अब क्या दो दिनों के लिए भर्ती करेंगे? उन्होंने कहा कि इसी जगह कोई गंभीर मरीज होता तो जांच रिपोर्ट आते-आते उसकी हालत काफी खराब हो जाती।
.मगर आंकड़े हो गए दुरुस्त
झांसी में कोरोना से मृत्यु दर एक समय 12 फीसदी से भी अधिक पहुंच गई थी। इससे मामला गर्मा गया था। शासन ने सीधे संज्ञान लेते हुए व्यवस्था दुरुस्त करने के निर्देश दिए थे। हॉटस्पॉट, कंटेनमेंट क्षेत्र में सैंपलिंग बढ़ने से कोरोना पॉजिटिव मरीजों की संख्या में तेजी से इजाफा हुआ। पिछले दो दिनों में तो सवा सौ से अधिक मरीज मिल रहे हैं। ऐसे में दो-तीन मौतें हो जाने के बावजूद मृत्यु दर गिर गई है। मौजूदा समय में मृत्यु दर जरूर पांच फीसदी से कम हो गई है लेकिन लगातार मौतों का सिलसिला जारी है।