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अपनों के होते हुए कोरोना संक्रमित के शव का अंतिम संस्कार किया बेगानों ने

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कोरोना से मौत - फोटो : ?????? ?? ???
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झांसी। कोरोना वायरस का संक्रमण केवल बीमारी और मौत ही नहीं दे रहा, तमाम सामाजिक परंपराओं और रिश्ते नातों की भूमिका में भी बाधक बन रहा है। इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि परिजनों के होते हुए भी एक कोरोना संक्रमित व्यक्ति की मौत के बाद उसके शव का अंतिम संस्कार गैरों के हाथों हुआ। इस दर्दनाक वाकये की जानकारी होने पर सभी की आंखें नम हो उठीं।
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हिंदू मान्यता के अनुसार पिता का अंतिम संस्कार उसका पुत्र करता है। पुत्र न होने की स्थिति में किसी अन्य परिजन को ये जिम्मेदारी सौंपी जाती है। लेकिन, कोरोना वायरस के संक्रमणकाल में ये मान्यताएं छिन्न-भिन्न होती जा रही हैं। अपनों के होने के बाद भी कोरोना संक्रमित की मौत के बाद मुखाग्नि देने जैसी महत्वपूर्ण परंपराओं का निर्वहन गैरों को करना पड़ रहा है।
महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में तीन दिन पहले एक कोरोना संक्रमित व्यक्ति की मौत के बाद उसके अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी एक परिचित को आगे आकर उठानी पड़ी। ऐसा नहीं कि मृतक का कोई परिजन नहीं था, लेकिन वो सब भी मजबूर थे। ऐसी विकट परिस्थितियों में उनके एक करीबी ने एक संस्था के पदाधिकारी के साथ मिलकर बड़ागांव गेट स्थित मुक्तिधाम में शव का अंतिम संस्कार हुआ।
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पहले भी आ चुकी हैं दर्दनाक तस्वीरें
झांसी। कोरोना वायरस के संक्रमणकाल के दौरान ऐसी कई दर्दनाक तस्वीरें सामने आ चुकी हैं। कोरोना संक्रमित जालौन के एक व्यक्ति की मौत के बाद उसके शव को झांसी में उसकी पत्नी ने मुखाग्नि दी थी। हालांकि, संक्रमित व्यक्ति के दो बेटे थे, लेकिन पत्नी ने बेटों को इस महामारी की चपेट में आने से बचाने के लिए खुद ये जिम्मेदारी उठाई थी। वहीं, एक रिटायर शिक्षक की मौत के बाद उसका अंतिम संस्कार पुलिस ने किया था। विदेश में रह रहा उसका बेटा यहां आ नहीं पाया था। जबकि, अन्य परिजन क्वारंटीन सेंटर में थे। ऐसे में अपनों की सबसे बड़ी जिम्मेदारी ने बेगाने हाथों ने पूरा किया था।
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