झांसी। कोरोना के इलाज में मनमाना शुल्क वसूलने वाले नर्सिंगहोमों के खिलाफ स्वास्थ्य विभाग ने जांच शुरू कर दी है। अभी विभाग के पास जमकर वसूली करने की पांच शिकायतें पहुंची हैं। शासन की तरफ से जांच कर सख्त कार्रवाई का आदेश जारी होने के बाद हड़कंप की स्थिति है। जांच टीम ने नर्सिंगहोमों से भी जवाब तलब किया गया है।
कोरोना काल में निजी अस्पतालों ने इलाज के दौरान मरीजों के साथ जमकर लूट की। हाल ये रहा कि कई मरीजों को इलाज के लिए जमीन और जेवर तक गिरवी रखने पड़े तो कइयों ने सूदखोरों से कर्ज तक लिया। मरीजों की इस समस्या को अमर उजाला ने प्रमुखता से उठाया। अब शासन ने वसूलीबाज नर्सिंगहोमों के खिलाफ जांच के आदेश दे दिए हैं। स्वास्थ्य विभाग के पास कोरोना के इलाज में मनमाना शुल्क वसूलने पर पांच नर्सिंगहोमों की शिकायत पहुंची है। इस पर जांच बैठा दी गई है। शिकायकर्ताओं ने बिल भी प्रस्तुत किए हैं। अब नर्सिंगहोमों से भी जवाब तलब किया गया है। जांच में कई अस्पतालों के खिलाफ कार्रवाई तय मानी जा रही है।
निजी अस्पतालों में इलाज की ये हैं दरें
सरकार द्वारा शहरों को ए, बी और सी श्रेणी में बांटते हुए इलाज की अलग-अलग दरें निर्धारित की गई हैं। झांसी बी श्रेणी और जालौन व ललितपुर सी श्रेणी में वर्गीकृत किया गया है। इसके अलावा दरों का विभाजन नेशनल एक्रिडिएशन बोर्ड ऑफ हॉस्पिटल्स एंड हेल्थकेयर (एनएबीएच) से संबद्ध और गैर संबद्ध अस्पतालों के आधार पर भी किया गया है।
एनएबीएच से संबद्ध अस्पतालों के लिए रेट
जनपद ऑक्सीजन पर आईसीयू वेंटिलेटर
झांसी 8000 12000 14400
ललितपुर 6000 9000 10800
जालौन 6000 9000 10800
एनएबीएच से गैर संबद्ध अस्पतालों के लिए रेट
जनपद ऑक्सीजन पर आईसीयू वेंटिलेटर
झांसी 6400 10400 12000
ललितपुर 4800 7800 9000
जालौन 4800 7800 9000
(यह रेट प्रतिदन के हैं)।
पैकेज में अन्य सुविधाएं भी हैं शामिल
शासन द्वारा निजी अस्पतालों के लिए तय की गई इलाज की दरों में अन्य सुविधाएं भी शामिल हैं। ऑक्सीजन, पीपीई किट, विजिट कंसल्टेंसी, वाईपैप, वेंटिलेटर, नर्सिंग केयर और सामान्य जांचें आदि का अलग से शुल्क नहीं वसूला जा सकता है।
कोरोना के इलाज में शासन द्वारा निर्धारित शुल्क से ज्यादा पैसा लेने की पांच शिकायतें मिली हैं। इसकी जांच शुरू कर दी गई है। नर्सिंगहोमों से भी जवाब मांगा गया है। यदि किसी और व्यक्ति से ज्यादा पैसा लिया गया है तो इंटीग्रेटेड कोविड कमांड सेंटर (आईसीसीसी) या फिर सीएमओ कार्यालय आकर शिकायत दर्ज करा सकते हैं। - डॉ. महेंद्र कुमार, जांच अधिकारी।