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कोरोना वायरस के खौफ से तारीख पर जाने से घबरा रहे कैदी

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मेडिकल कॉलेज के गेट नं. एक पर लगा कोरोना वायरस से बचाव के तरीकों का होर्डिंग।
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झांसी। कोरोना वायरस का खौफ लोगों के साथ जेल के कैदियों पर भी नजर आने लगा है। जिला कारागार में बंद कैदी भी कोरोना को लेकर सतर्कता बरतने लगे हैं। अधिकांश कैदी तो अदालत में तारीख पर जानेे से भी बचने की गुहार लगा रहे हैं। हालांकि, जेल प्रशासन ने इंतजाम करना शुरू कर दिए हैं। अतिरिक्त दवाएं भी मंगा ली हैं। जुकाम व खांसी होने पर तुरंत उपचार किया जा रहा है। स्क्रीनिंग के बाद ही कैदियों को प्रवेश मिल रहा है।
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लोगों में दहशत फैलाने वाले शातिर बदमाश कोरोना के खौफ से कांपने लगे हैं। लूट, मर्डर, डकैती, छिनैती करने वाले बंदी भी बीमारी के नाम पर डर गए हैं। जेल के भीतर उनको भी वायरस का खतरा महसूस होने लगा है। जिला कारागार में 1,273 कैदी बंद हैं। बाहर से आ रही कोरोना वायरस की खबरों ने उनके माथों पर चिंता की लकीरें खड़ी कर दी है। प्रतिदिन करीब पांच सौ से अधिक मुलाकाती अपने-अपने लोगों से मिलने जेल आ रहे हैं। ऐसे में सभी को यह डर है कि कहीं किसी के जरिये वायरस उनमें प्रवेश न कर जाए। इसको लेकर कैदी भी पूरी तरह सतर्क हो गए हैं। छह डॉक्टरों की टीम ने भी पूरे इंतजाम किए है। किसी भी कैदी को जरा सी खांसी, जुकाम या फिर बुखार आने पर तुरंत उपचार कराया जा रहा है। साथ ही उनकी जांच भी कराई जा रही है।
सजा से ज्यादा सता रहा बीमारी का डर
जिला कारागार में मर्डर, लूट, मारपीट, चोरी, छिनैती व गैंगरेप सहित अन्य कई धाराओं के अभियुक्त बंद हैं। अंग्रेजों के जमाने में बनी जेल में बंदियों के लिए 450 की क्षमता है। लेकिन क्षमता से करीब तीन गुने बंदी जेल में हैं। बंदियों की भीड़ होने के कारण बैरकों में भी संख्या अधिक है। ऐसे में कैदियों को वायरस फैलने का खतरा बना हुआ है। अचानक कोरोना का वायरस बढ़ने पर बंदियों के परिजन भी चिंता में आ गए हैं। मुकदमों में सजा से ज्यादा उनको बीमारी का डर लगने लगा है।
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इन बीमारियों से हैं ग्रसित
जिला कारागार में करीब 400 कैदियों का उपचार चल रहा है। इसमें किसी को टीबी, डायबिटीज, हार्ट प्रॉब्लम और स्किन की बीमारी का उपचार कराया जा रहा है। जेल में तैनात चिकित्सक जांच पड़ताल करते हैं। कोई गंभीर मामला होने पर बंदियों को जिला अस्पताल व मेडिकल कॉलेज भेज दिया जाता है। कोरोना वायरस के बाद जिला कारागार में साफ-सफाई पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
जिला कारागार में निरुद्घ बंदियों को कोई खतरा नहीं है। किसी बंदी के आने पर उसकी सघन पड़ताल की जाएगी। हाल फिलहाल में बंदी काफी सुरक्षित हैं, क्योंकि उनका बाहर के लोगों से कोई संपर्क नहीं है। जागरूकता के लिए जल्द ही जेल के डॉक्टर कैंप भी लगना है।
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राजीव कुमार शुक्ला, वरिष्ठ जेल अधीक्षक
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