सिपाही बेटी के दूसरी जाति के दरोगा से शादी करने के बाद गांव में परिवार का हुक्का-पानी बंद कर दिया गया। इतना ही नहीं, खुद को समाज का ठेकेदार बताने वाले एक व्यक्ति ने एलान कर दिया कि यदि गांव में लड़की आई तो उसे जूते मारकर बाहर निकाल दिया जाएगा।
पिता की शिकायत पर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर उसकी तलाश शुरू कर दी है। ग्राम बचेरा निवासी चिरंजीलाल यादव ने पुलिस को शिकायती पत्र दिया, जिसमें उसने बताया कि उसकी बेटी उत्तर प्रदेश पुलिस में आरक्षी के पद पर कार्यरत है।
30 अप्रैल को बेटी की शादी परिवार की रजामंदी से पुलिस में उप निरीक्षक पद पर तैनात पटेल समाज के एक युवक से हुई थी। इस शादी से परिवार के किसी भी व्यक्ति को कोई ऐतराज नहीं है। लेकिन, इस अंतरजातीय विवाह का गांव के एक व्यक्ति संतोष यादव द्वारा विरोध किया जा रहा है।
वह खुलेआम कह रहा कि गांव का कोई भी व्यक्ति उसके परिवार से बात करेगा या संबंध रखेगा तो उस पर 50 हजार रुपये जुर्माना लगाया जाएगा। इतना ही नहीं, संतोष यादव ने एलान किया है कि बेटी के आने पर उसे जूते मारकर गांव से बाहर निकाल दिया जाएगा।
पिता ने बताया कि संतोष आपराधिक प्रवृत्ति का व्यक्ति है। पूरा गांव उसके दबाव में हैं, जिसके चलते उसके परिवार की रोजमर्रा की चीजों की आपूर्ति रोक दी गई है। यहां तक कि डेयरी से दूध देने तक से मना कर दिया गया है।
जातीय आधार पर अलग-थलग किया परिवार
उसके परिवार को जातीय आधार पर अलग-थलग कर दिया गया है। इससे पूरा परिवार सदमे में हैं। इसका असर आगे उनके परिवार में भतीजे-भतिजियों की शादी पर भी पड़ सकता है। पिता की शिकायत पर पुलिस ने टोड़ी फतेहपुर थाने में आरोपी संतोष यादव के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर दिया है।
थानाध्यक्ष सत्यप्रकाश शर्मा ने बताया कि आरोपी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। गांव में एहतियातन पुलिस भी तैनात कर दी गई है। उन्होंने कहा कि देश का संविधान अंतरजातीय विवाह की पूरी इजाजत देता है और किसी को भी ऐसे वैधानिक विवाह का विरोध करने या धमकी देने का अधिकार नहीं है।