गौरतलब है कि 19 मार्च को उत्कल एक्सप्रेस के कोच नंबर बी-2 में नन लीविया थोमस व हेमलता सवार हुई थीं। उनके साथ दो किशोरियां श्वेता व बीतरंग भी थीं। अचानक शाम 7.30 बजे चारों को झांसी स्टेशन पर जीआरपी ने उतार लिया था। पुलिस उन्हें थाने ले आई और धर्मांतरण को लेकर पूछताछ शुरू कर दी। तब उन्हें बताया गया कि एबीवीपी के कार्यकर्ताओं ने शिकायत है कि दो किशोरियों को धर्मांतरण के लिए ले जाया जा रहा है।
उन्होंने पुलिस को बताया कि ऐसा कोई मामला नहीं है। वे दिल्ली की एक चर्च से ट्रेनिंग करके लौट रहीं हैं और इसके उनके पास प्रमाण भी हैं। उन्होंने प्रमाण पत्र भी दिखाए। साथ ही आधार कार्ड भी पुलिस के सामने रखे। बावजूद, पुलिस लगातार नजरंदाज करती रही और सवाल दागती रही। उन्होंने व्हाट्सएप के जरिए भी प्रपत्र मंगाए और पुलिस को दिखाए, परंतु ध्यान नहीं दिया गया।