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नहाय खाय के साथ छठ पूजा महापर्व आज से

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chath puja2.jpg - फोटो : chath puja2.jpg
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झांसी। बुधवार को लोक आस्था के महापर्व छठ पूजा का शुभारंभ नहाय खाय के साथ होगा। चार दिनों तक चलने वाले इस महापर्व पर बिहार - पूर्वांचल समाज के परिवार भगवान भास्कर की आराधना करेंगे। अस्त होते और उदित होते सूर्य को अर्घ्य देंगे। छठ माता की पूजा कर जीवन में सुख समृद्धि की कामनाएं करेंगे। त्योहार को लेकर तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी है।
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बिहार - पूर्वांचल के लोगों के लिए छठ पूजा मुख्य पर्व है। महानगर में आईटीआई क्षेत्र, सूती मिल, पंचकुइयां मंदिर के समीप गोशाला, प्रेमनगर, भेल, बड़ागांव गेट बाहर क्षेत्र सहित कई अन्य इलाकों में रह रहे बिहार व पूर्वांचल समाज के परिवारों ने तैयारियां पूरी कर ली है। सूर्य देव को अर्घ्य देने के लिए अस्थायी जल कुंडों को दुरुस्त कर लिया गया है। इधर छठ पूजा को लेकर बिहार - पूर्वांचल सांस्कृतिक कुटुंब के तत्वावधान में आईटीआई छठ पूजा समिति की बैठक हुई। इसमें शैलेश राय, शिवम यादव ने बताया कि हर साल की तरह आईटीआई पहाड़ी के नीचे नरसिंह धाम परिसर में छठ पूजा का आयोजन होगा।
एके दास ने बताया कि छठ महापर्व पूजा, डाला छठ, सूर्य षष्ठी पूजा आदि नामों से जाना जाता है। 18 नवंबर को नहाय खाय, 19 को खरना, 20 को डूबते सूर्य को अर्घ्य एवं 21 नवंबर को उदय होते सूर्य को अर्घ्य देकर मनाया जाएगा। बैठक में सुदर्शन राय, शैलेश राय, अश्विनी सिंह, राजकुमार सिंह, राम बाबू यादव, अंजनी कुमार सिंह, जीवन कुमार, मधुकर, सरिता राय, सुमन दास, नीतू सिंह, नवल यादव आदि मौजूद रहे।
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यह है मान्यता, बनता है यह प्रसाद
छठ पूजा में महिलाएं आटा और गुड़ से बना ठेकुआ, गुड़ अथवा गन्ने के रस से खीर बनाती है। साथ ही लौकी व चावल से प्रसाद तैयार करती हैं। पूजा में मौसमी सब्जियों, फलों का उपयोग किया जाता है। धार्मिक मान्यता है कि छठ माता व भगवान सूर्य की पूजा से सभी कष्ट समाप्त हो जाते हैं। सूर्य संहिता में वर्णित है कि कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की पंचमी, षष्ठी, सप्तमी और छठ को व्रत रखा जाता है।
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